कम बारिश फिर भी खमगड़ा जलाशय का गेट खुला छोड़ दिया, अब सिंचाई के लिए पानी नहीं

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Oct 03, 2018

जोशपुर

कोतबा क्षेत्र में बारिश कम होने से किसानों की फसल मर रही है। पौधों का विकास रुक गया है और जमीन में दरारें पड़ चुकी है। इधर खमगड़ा जलाशय में भी जलभराव नहीं हो पाया है क्योंकि जल संसाधन विभाग ने जलभराव के समय जलाशय की सभी गेटों को खुला छोड़ दिया था। ऐसे में अब किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। जल संसाधन विभाग अब चाहकर भी किसानों की खेत में पानी नहीं पहुंचा सकता है। ऐसी स्थिति में वे किसान ही अपनी फसल बचा पाएंगे, जिनके पास स्वयं के सिंचाई के साधन उपलब्ध हैं।

जिस खमगड़ा जलाशय के भरोसे पर इस वर्ष कोतबा के किसानों ने ग्रीष्मकालीन फसल उगाई, वह जलाशय इस वर्ष खरीफ की फसलों को भी बचाने में नाकामयाब साबित हो रहा है। विभागीय आंकड़े बताते हैं कि अब तक खमगड़ा जलाशय में सिर्फ 33 फीसदी जल भराव हुआ है। विभागीय अधिकारी इसकी वजह बारिश नहीं होना बताते हैं, जबकि हकीकत कुछ और ही सामने आ रही है। आसपास के किसानों का कहना है कि खमगड़ा जलाशय में जलभराव नहीं होने का कारण पानी नहीं रोकना है। बारिश के पूरे सीजन में खमगड़ा जलाशय के सभी गेटों को खुला छोड़ दिया गया था। इस कारण बारिश का जमा पानी बह गया।

जलाशय में मात्र 33 % पानी का हो पाया भराव, फसल सूखने पर कृषि विभाग और जल संसाधन की लापरवाही का खामियाजा भुगतेंगे किसान

सिर्फ 48916 एकड़ में लगी फसल का हुआ है बीमा

इस वर्ष जिले भर में 6 लाख 42 हजार एकड़ जमीन पर खरीफ की फसल लगी है। इसके विरुद्ध सिर्फ 48 हजार 916 एकड़ में लगी फसल का ही बीमा हो पाया है। फसलों का बीमा कराने वाले ऋण लेने वाले किसान 8 हजार 879 हैं, जबकि अऋणी किसानों की संख्या सिर्फ 706 है, जिन्होंने अपनी फसल का बीमा कराया। बीते साल जिले में 23 हजार 911 किसानों ने अपनी फसल का बीमा कराया था। इस प्रकार इस साल 60 फीसदी किसान बीमा का लाभ कराने से वंचित हो गए। फसल बीमा के लिए समय नहीं मिल पाने से इस वर्ष किसानों की फसल का बीमा नहीं हो पाया। दरअसल खरीफ के शुरुआती सीजन में शासन द्वारा किसी भी कंपनी को फसल बीमा का जिम्मा नहीं दिया गया था। जशपुर सहित प्रदेश में 5 जिलों के लिए सरकार ने किसी भी कंपनी को बीमा की अनुमति नहीं दी थी। लिहाजा जिले में बीमा का काम समय पर शुरू नहीं किया गया। शासन के निर्देश पर 28 जुलाई को बीमा करने का आदेश एक बीमा कंपनी को मिला तो 29 से 31 जुलाई तक तीन दिन फसल बीमा का काम किया गया।

5 हजार एकड़ की फसल पर मंडरा रहा खतरा

कोतबा क्षेत्र में लगभग 5 हजार एकड़ भूमि पर फसल लगी है। धान के अलावा दलहन और तिलहन की फसल भी लगाई गई है। दलहन की फसल ज्यादा प्रभावित नहीं है पर धान की फसल पर असर दिख रहा है। धान को अधिक पानी की जरूरत होती है और वर्तमान में स्थिति यह है कि खेत की जमीन सूखे के कारण फट चुकी है। ऐसी स्थिति में पौधों का विकास ही रुक गया है। यदि पौधों का सही ग्रोथ होता तो कुछ अब पौधों में बालियां आने का सीजन था, पर इधर धान के पौधों में बालियां नहीं आ सकी है।

लापरवाही: जवाब देने से बच रहे अधिकारी

मामले में अब विभागीय अफसर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। जल संसाधन विभाग के एसडीओ श्री धमीजा से इस संबंध में हमने बात कनी चाही पर कई बार संपर्क किए जाने के बाद उन्होंने कोई ना कोई बहाना कर मामले को लेकर बातचीत ही नहीं की। पहले कॉल में उन्होंने स्वयं को गांधी जयंती के कार्यक्रम में होना बताया। शाम को अधिकारी का मोबाइल ही बंद हो गया।

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