विभाग नहीं पहुंचा सकता पानी तो एक लाख हेक्टेयर में सिंचाई के लिए बांधे जा रहे नाले

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महासमुंद| Sep 20, 2018

जिले में कुल 2.42 लाख हेक्टेयर जमीन पर धान की खेती होती है। इसमें से करीब 20 हजार हेक्टेयर जमीन ढलान पर होने के कारण यहां न तो किसी नाले से सिंचाई की व्यवस्था है और न ही किसी बांध से यहां पर पानी पहुंचाया जा सकता है। इसलिए यहां की खेती सिर्फ बारिश के भरोसे है।

लेकिन दो हफ्तों से अच्छी बारिश नहीं होने से इस 20 हजार हेक्टेयर में लगी धान की फसल में पानी की बेहद कमी हो गई। विशेषज्ञों के मुताबिक अभी धान की फसल को कम से कम एक महीने तक अच्छे पानी की जरूरत है। ऐसे में अगर अगले एक सप्ताह में बारिश नहीं हुई तो 20 हजार हेक्टेयर में लगी धान की फसल बर्बाद हो जाएगी।

इसके आलावा करीब एक लाख हेक्टेयर में लगी धान की खेती ऐसी हिस्से में की जाती है जहां थोड़ी बहुत नमी बची हुई है। लेकिन यहां भी पानी की जरूरत बनी हुई है। ऐसे में अगर अगले 10 दिनों में बारिश नहीं होती है तो विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इतने बड़े हिस्से में पानी पहुंचाया नहीं जा सकता। ऐसे हालात देखते हुए यहां के किसानों ने बरसाती नालों को बांधना शुरू कर दिया है, जिनमें मार्च तक पानी बना रहता है।

तीन साल के मुकाबले इस साल सबसे ज्यादा बारिश लेकिन 20 हजार हेक्टेयर में फसल बारिश भरोसे

बारिश नहीं होने के कारण किसान खुद से नाला बांधकर पानी ले रहे हैं। जबकि यह काम प्रशासन का है। भलेसर के किसान खिलावन, भगवानी, गोप सिन्हा, डीलक सिन्हा, गणेश का कहना है कि मिट्टी की जमीन भाठा होने के कारण खेतों में जमा पानी खाली हो गया है। खेतों में देर से पानी मिलने पर नुकसान बढ़ेगा।

सिंचित व असिंचित दोनों क्षेत्र के किसान चिंतित

हफ्तेभर में बारिश जरूरी नहीं तो होगा बड़ा नुकसान

वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी बीआर घोड़ेसवार का कहना है कि बारिश नहीं होने के कारण कई इलाकों में पानी की डिमांड शुरू हो गई है। जिले के कई क्षेत्रों में खेत की जमीन भाठा एवं पहाड़ी प्रकृति की है। इसके कारण खेत में पानी की ज्यादा जरूरत पड़ती है। एक हफ्ते के भीतर बारिश होना जरूरी है। पानी न मिलने पर किसानों की फसल को नुकसान होना तय है। क्याेंकि बारिश के अलावा ढलान और पहाड़ी क्षेत्रों में सिंचाई के लिए कोई विकल्प नहीं है।

कृषि विभाग के अनुसार सितंबर का एक पखवाड़ा बीतने के बाद हालत ये है कि जिले 10 फीसदी खेतों में पानी की मांग शुरू हो गई है। यानी करीब 20 हजार हेक्टेयर खेत में लगे फसल को तत्काल पानी की जरूरत है। सप्ताहभर में बारिश न होने पर धान के उत्पादन पर असर पड़ेगा। इस साल जिले में 2 लाख 42 हजार 460 हेक्टेयर कृषि भूमि पर धान की बोवनी की गई है। शुरूआती दौर में रूक रूककर बारिश के बाद अगस्त में काफी अच्छी बारिश हुई। सितंबर के पहले सप्ताह के बाद बारिश बंद होने से किसानों को फसल बचाने की चिंता होने लगी है।

अर्ली वैरायटी के धान में आने लगी बाली

पिछले तीन साल के मुकाबले इस वर्ष जिले में अच्छी बारिश हुई है। बारिश के चलते जिले के अधिकांश बांध भरे हुए हैं। बावजूद इसके उन क्षेत्रों के किसान चिंतित हैं, जहां सिंचाई के कोई साधन नहीं है। क्योंकि जिले में पिछले 10 दिनों से अच्छी बारिश ही नहीं हुई है। यही कारण है कि जिले के करीब 20 हजार हेक्टेयर में धान की फसल को खतरा है। इन क्षेत्रों के किसानों को चिंता सता रही है कि धान की बालियां कम न आए। मौसम वैज्ञानिक पोषण की मानें तो जिले के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। कहीं-कहीं गरज चमक के साथ बौछारें पड़ सकती है। लेकिन ये खंड वर्षा होगी या अच्छी बारिश होगी ये देखने वाली बात है। कृषि वैज्ञानिक मनोज श्रीवास्तव का कहना है कि बारिश न होने पर लेट और मध्यम अवधि के धान की फसल को ज्यादा नुकसान होगा। अर्ली वैरायटी के धान में बाली आने लगी है और लेट वैरायटी के धान कंसा आने के स्टेज पर है। ज्यादा देर हुई तो फसल सूख जाएगी।

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