अरब सागर में बने चक्रवात से आधा घंटा तेज बारिश खेतों में बची सोयाबीन भी खराब होने का अंदेशा

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बुरहानपुर Nov 01, 2019

अरब सागर में बने चक्रवात के कारण गुरुवार शाम शहर सहित कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में फिर तेज बारिश हुई। आधे घंटे में शहर में 10 मिमी पानी बरस गया। बारिश इतनी तेज हुई कि लोग कुछ समझ नहीं पाए। भीगने से बचने के लिए आसरा तक तलाश नहीं पाए। उधर, दो दिन से धूप खिली होने के कारण किसान खेतों में बची-खुची सोयाबीन फसल काटने की तैयारी में थे लेकिन बारिश ने उनकी उम्मीदों पर एक बार फिर पानी फेर दिया। इससे खेतों में खड़ी सोयाबीन फसल खराब होने का अंदेशा है। अब बारिश में भीगी फसल को सूखाने के लिए उन्हें एक हफ्ते और इंतजार करना पड़ेगा लेकिन इस दौरान भी मौसम के दगा देने का डर बना हुआ है।

लोगों के अनुसार अक्टूबर में एेसा पहली बार हुआ है जब 13 दिन बारिश हुई हो और 20 दिन बादल रहे हो। 11 दिन तक तो धूप ही नहीं निकली। जिले में इन 13 दिन में 3.5 इंच बारिश हुई है। यह अक्टूबर में हुई अब तक की सबसे ज्यादा बारिश है। बेमौसम बारिश किसानों के लिए आफत बनकर बरसी है। उनके अनुसार अक्टूबर में हुई बारिश से 75 फीसदी फसलों को नुकसान पहुंचा है। ऐसे में उत्पादन आधे से भी कम होगा।

जिले में पिछले साल से 18 इंच ज्यादा बारिश

जिले में इस साल पिछले साल से 18 इंच ज्यादा बारिश हुई है। मौसम ऐसा ही रहा तो इसमें और इजाफा हो सकता है। 1 जून से अब तक जिले में 51.46 इंच पानी बरसा है। पिछले साल 33.16 इंच ही बारिश हुई थी। यह जिले की औसत बारिश के बराबर है।

अक्टूबर के 13 दिन में 3.5 इंच पानी बरसा, 20 दिन तक बादल छाए रहे

लोगों ने कहा- एेसा मौसम पहले कभी नहीं रहा

दलहनी फसल तो उग ही नहीं पाई : केला, मक्का, ज्वार और कपास फसल प्रभािवत

केला, मक्का, ज्वार और कपास फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। उड़द, मूंग और अन्य दलहनी फसलें तो उग ही नहीं पाईं। ये खेतों में ही पूरी तरह बर्बाद हो गईं। सरकारी अमले ने बुधवार से सर्वे शुरू तो किया है, लेकिन उनके खेतों तक पहुंचने से पहले ही फसलें अंकुरित होकर पूरी तरह खराब होने की स्थिति में आ गई है। कपास के गेठों में अंकुरण होने से उपज निकलना मुश्किल नजर आ रहा है। धनतेरस से मंडी में कपास की आवक होती थी, लेकिन दीपावली बाद भी ऐसी स्थिति नजर नहीं आ रही है। कपास मंडी सूनी पड़ी है।

बिजली गिरने से बैल की मौत, तेज हवा और बारिश से फसलें आड़ी, कपास को ज्यादा नुकसान

डोईफोड़िया | क्षेत्र में गुरुवार दोपहर तेज हवा के साथ बारिश हुई। इससे खेतों में खड़ी फसलें आड़ी पड़ गईं। ताजनापुर में किसान विनोद मराठा के खेत में बिजली गिरने से यहां बंधे बैल की मौत हो गई। बारिश थमने के बाद वे खेत पहुंचे तो बैल मृत पड़ा मिला। हवा-बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान कपास की फसल को हुआ है। बारिश में लगाई कपास अब तैयार हो रही है। इसके गेठे निकल आए हैं लेकिन बारिश और तेज हवा से फसल आड़ी हो गई। किसानों के अनुसार इससे फूल और गेठों को नुकसान होगा। उत्पादन और गुणवत्ता पर भी असर पड़ेगा। क्षेत्र में साेयाबीन, ज्वार और मक्का फसल पहले ही खराब हो चुकी हैं।

पहला चक्रवात ओमान गया: दूसरा अरब सागर में, इसलिए हो रही है बारिश

अरब सागर में बन रहे चक्रवात के कारण लगातार बारिश हो रही है। दो दिन से मौसम साफ रहने के बाद गुरुवार दोपहर से मौसम फिर बदला और शाम को आधा घंटा तेज बारिश हुई। मौसम वैज्ञानिक उदय सरवटे ने बताया अरब सागर में बना पहला चक्रवात ओमान की तरफ जा चुका है। लेकिन दूसरा भारत के पास है। इसलिए मौसम में आद्रता बढ़ने से बारिश हुई है। यह चक्रवात फिलहाल अरब सागर में ही बना हुआ है। लेकिन यह भी ओमान की तरफ ही जाएगा। दो दिन बाद मौसम साफ होने के आसार हैं।

80% खराब हुई 54 हजार हैक्टेयर में लगी सोयाबीन, कपास और मक्का फसल

खकनार | क्षेत्र में लगातार बारिश से इस बार फसलों को 80 प्रतिशत से भी ज्यादा नुकसान हुआ है। किसान कपास, मक्का और ज्वार फसल की आस तो पहले ही खो चुके हैं। बची-खुची सोयाबीन से उन्हें थोड़ी-सी उम्मीद है लेकिन बािरश इसे भी तोड़ रही है। दो दिन तक तेज धूप निकलने से किसानों ने सोयाबीन फसल काटने की तैयारी की थी। लेकिन गुरुवार शाम हुई तेज बारिश ने उन्हें फिर मायूस कर दिया है। बारिश के कारण सोयाबीन फसल में भी अंकुरण होने लगा है। ऐसे में किसानों के हाथ में उपज के नाम पर कुछ भी नहीं आ सकेगा। खकनार क्षेत्र में 54 हजार हैक्टेयर में सोयाबीन, कपास और मक्का फसल की बोवनी की गई थी।

खकनार और आसपास के क्षेत्र में गुरुवार 3 बजे से तेज बारिश हुई। यह रुक-रुककर 4.45 बजे तक जारी रही। इससे खेतों में पानी भर गया। जंगल में तेज बारिश होने से नदी-नालों में भी पानी आ गया। खकनार क्षेत्र में सोयाबीन 9 हजार 325 हैक्टेयर, कपास 28 हजार 750 हैक्टेयर और मक्का 16 हजार 900 हैक्टेयर में लगा है। किसान प्रकाश चोपड़े, आशाराम चतुरकर, नीरज तांदड़े और बाड़ू शिवराम ने बताया फसलों को 80 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। उत्पादन तो दूर, जितना बोया, उतना भी निकलने की उम्मीद नहीं बची है। आवक 25 प्रतिशत भी नहीं हो पाएगी। सोयाबीन की फसल बची थी, लेकिन खराब मौसम से उसमें भी अंकुरण नजर आ रहा है। ऐसे में सोयाबीन फसल भी पूरी तरह खराब हो जाएगी।

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