किसानों के वैध बिजली कनेक्शन, क्योंकि एसडीएम से मिली नाले के पानी से सब्जियां सींचने की अनुमति, खसरे में भी अंकित

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बुरहानपुर Nov 29, 2019

कभी-कभी शासन और प्रशासन की नीतियों पर भी ताज्जुब होता है कि एेसा भी कुछ हो सकता है, क्योंकि सालभर आमजन के स्वास्थ्य पर करोड़ों खर्च कर रहे हैं और दूसरी तरफ नाले से सब्जियां सींचने के लिए बिजली कनेक्शन दे रहे हैं। इसके लिए बाकायदा किसानों को एसडीएम कार्यालय से एनओसी जारी की गई है। ये सारे चौंकाने वाले तथ्य भास्कर पड़ताल में सामने आए हैं। इससे प्रशासन की भी लापरवाही उजागर हो रही है।

प्रगति नगर के पीछे से ताप्ती नदी के छोटे पुल तक गुजरे पांढारोल नाले के दोनों ओर करीब 100 से ज्यादा किसानों के खेत हैं। अधिकांश के पास नाले के पानी से सब्जियां सींचने के लिए मोटरपंप चलाने के वैध बिजली कनेक्शन है। पड़ताल में सामने आया कि जिन-जिन किसानों ने सिंचाई के लिए मोटरपंप चलाने बिजली कंपनी से कनेक्शन लिए थे। उनसे अनुविभागीय कार्यालय से अनुमति पत्र मंगवाए गए थे। कार्यालय से बाकायदा सिंचाई का जल स्त्रोत नाले का पानी बताया गया। उसी आधार पर कंपनी से बिजली कनेक्शन दिए। करीब 75 से ज्यादा ऐसे किसान हैं, जो गंदे पानी से सब्जियां सींच रहे हैं। अधिकांश के खसरे की कैफियत में भी ये स्पष्ट है। इसमें नाले से पीवत तो कुछ में सिंचाई नाले से अंकित है। वर्ष 2016 में प्रशासन और निगम ने नोटिस जारी किए थे। जवाब में एसडीएम की अनुमति और वैध कनेक्शन बताने पर छोड़ दिया गया। यही कारण है कि आमजन आज भी जहरीली सब्जियां खाने को मजबूर है।

प्रगति नगर से ताप्ती के छोटे पुल तक गुजरे पांढारोल नाला के दोनों ओर 75 से ज्यादा किसान उगा रहे सब्जियां

भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर

कभी-कभी शासन और प्रशासन की नीतियों पर भी ताज्जुब होता है कि एेसा भी कुछ हो सकता है, क्योंकि सालभर आमजन के स्वास्थ्य पर करोड़ों खर्च कर रहे हैं और दूसरी तरफ नाले से सब्जियां सींचने के लिए बिजली कनेक्शन दे रहे हैं। इसके लिए बाकायदा किसानों को एसडीएम कार्यालय से एनओसी जारी की गई है। ये सारे चौंकाने वाले तथ्य भास्कर पड़ताल में सामने आए हैं। इससे प्रशासन की भी लापरवाही उजागर हो रही है।

प्रगति नगर के पीछे से ताप्ती नदी के छोटे पुल तक गुजरे पांढारोल नाले के दोनों ओर करीब 100 से ज्यादा किसानों के खेत हैं। अधिकांश के पास नाले के पानी से सब्जियां सींचने के लिए मोटरपंप चलाने के वैध बिजली कनेक्शन है। पड़ताल में सामने आया कि जिन-जिन किसानों ने सिंचाई के लिए मोटरपंप चलाने बिजली कंपनी से कनेक्शन लिए थे। उनसे अनुविभागीय कार्यालय से अनुमति पत्र मंगवाए गए थे। कार्यालय से बाकायदा सिंचाई का जल स्त्रोत नाले का पानी बताया गया। उसी आधार पर कंपनी से बिजली कनेक्शन दिए। करीब 75 से ज्यादा ऐसे किसान हैं, जो गंदे पानी से सब्जियां सींच रहे हैं। अधिकांश के खसरे की कैफियत में भी ये स्पष्ट है। इसमें नाले से पीवत तो कुछ में सिंचाई नाले से अंकित है। वर्ष 2016 में प्रशासन और निगम ने नोटिस जारी किए थे। जवाब में एसडीएम की अनुमति और वैध कनेक्शन बताने पर छोड़ दिया गया। यही कारण है कि आमजन आज भी जहरीली सब्जियां खाने को मजबूर है।

खसरा नंबर 325 की कैफियत में सिंचाई नाले से स्पष्ट अंकित है।

ये रहा उदाहरण

मोहम्मदपुरा के खसरा नंबर 325 की 1.7300 एकड़ पर मनोहर पिता राजाराम, एमागिर्द के खसरा नबर 558 की 0.2100 एकड़ जमीन पर छंगू पिता निलामन, खसरा नंबर 574 सहित अन्य पर नाले से पीवत (नाले के पानी से सिंचाई) अंकित है। ये खसरे आॅनलाइन निकाले गए हैं।

भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर

कभी-कभी शासन और प्रशासन की नीतियों पर भी ताज्जुब होता है कि एेसा भी कुछ हो सकता है, क्योंकि सालभर आमजन के स्वास्थ्य पर करोड़ों खर्च कर रहे हैं और दूसरी तरफ नाले से सब्जियां सींचने के लिए बिजली कनेक्शन दे रहे हैं। इसके लिए बाकायदा किसानों को एसडीएम कार्यालय से एनओसी जारी की गई है। ये सारे चौंकाने वाले तथ्य भास्कर पड़ताल में सामने आए हैं। इससे प्रशासन की भी लापरवाही उजागर हो रही है।

प्रगति नगर के पीछे से ताप्ती नदी के छोटे पुल तक गुजरे पांढारोल नाले के दोनों ओर करीब 100 से ज्यादा किसानों के खेत हैं। अधिकांश के पास नाले के पानी से सब्जियां सींचने के लिए मोटरपंप चलाने के वैध बिजली कनेक्शन है। पड़ताल में सामने आया कि जिन-जिन किसानों ने सिंचाई के लिए मोटरपंप चलाने बिजली कंपनी से कनेक्शन लिए थे। उनसे अनुविभागीय कार्यालय से अनुमति पत्र मंगवाए गए थे। कार्यालय से बाकायदा सिंचाई का जल स्त्रोत नाले का पानी बताया गया। उसी आधार पर कंपनी से बिजली कनेक्शन दिए। करीब 75 से ज्यादा ऐसे किसान हैं, जो गंदे पानी से सब्जियां सींच रहे हैं। अधिकांश के खसरे की कैफियत में भी ये स्पष्ट है। इसमें नाले से पीवत तो कुछ में सिंचाई नाले से अंकित है। वर्ष 2016 में प्रशासन और निगम ने नोटिस जारी किए थे। जवाब में एसडीएम की अनुमति और वैध कनेक्शन बताने पर छोड़ दिया गया। यही कारण है कि आमजन आज भी जहरीली सब्जियां खाने को मजबूर है।

कनेक्शन नहीं देंगे तो बिजली चोरी करेंगे

 

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