233 हेक्टेयर की सिंचाई क्षमता वाले तालाब से सिर्फ 25 हे. के किसानों को दिया जा रहा पानी

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तेंदूखेड़ा Dec 23, 2019

वर्ष 2013 में 2 करोड़ 12 लाख की लागत से बने लालपानी के तालाब में घटिया निर्माण के कारण बरसात खत्म होते ही पानी नहीं बचता है। जिससे क्षेत्र के किसानों को लालपानी के तलाब से आज तक कोई लाभ नहीं मिला है।

दैनिक भास्कर ने 10 जून 2017 में तालाब ऐसा घटिया बनाया कि नहरों तक नहीं पहुंच पाया एक बूंद पानी व 28 मार्च 2018 में करोड़ों के तालाब चढ़ गए घटिया निर्माण की भंेट, किसी में रिसाव तो कहीं दीवार टूटी शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी जिसमें जल संसाधन विभाग के आला अफसर व ठेकेदार की मिली भगत का खुलासा किया था।

साथ ही वर्तमान में चल रहे विधान सभा के शीतकालीन सत्र में क्षेत्रीय विधायक ने लालपानी के तलाब का मुद्दा अपने प्रश्न क्रमाक 1603 के माध्यम से संबंधित मंत्री से पूछा है कि क्या जबेरा विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत लालपानी जलाशय का निर्माण किया गया था जिसमें रिसाव होने के कारण आज तक जल भराव नहीं हुआ है। जिसका सुधार कार्य का प्राक्कलन प्रमुख अभियंता भोपाल के पास विगत कई महिनों से लंबित है, यदि हां तो इसकी प्रशासकीय स्वीकृति प्रदाय कर कब तक सुधार कार्य कराया जाएगा समयावधि बताए?

प्रश्न के उत्तर में जल संसाधन मंत्री हुकुम सिंह कराड़ा ने कहा है लालपानी जलाशय से रिसाव होने से जल भराव कम होना प्रतिवेदित है। जी नहीं। प्रमुख अभियंता द्वारा आवश्यक सुधार के लिए प्राक्कलन 15 नंवबर 2019 द्वारा वापस किया गया। प्राक्कलन मैदानी कार्यालयों में परीक्षणाधीन होने से समय सीमा बताना संभव नहीं है ये उत्तर दिया है। जबकि ये मामला भ्रष्टाचार से जुड़ा है, लालपानी के तालाव के सुधार मेंने कम से कम 70 लाख रुपए विभाग को खर्च करना पड़ेंगे इसके बाद ही तालाब में पानी रोकना संभव होगा लेकिन कई सालों से विभाग के अधिकारी मरम्मत नहीं करा पा रहे हैं। जिसका कारण है कि नया तालाब बनने के एक या दो सालों में मरम्मत नहीं कराई जा सकती थी। विभाग मरम्मत कराता है तो उसके घटिया निर्माण की कलई खुल जाएगी जिस कारण ग्रामवासियों के द्वारा कई आवेदन व जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाने के बाद भी तालाब की मरम्मत नहीं हो रही है।

दरअसल 2013 में 2 करोड़ 12 लाख की लागत से लालपानी के तालाब का निर्माण कराया गया था जिसकी सिंचाई क्षमता 233 हेक्टेयर रखी गई थी, जिससे खमरियां, अजीतपुर व सिंगपुर ग्राम के किसानों को पानी दिया जाना था लेकिन सिंचाई विभाग के अधिकारियों की अनदेखी के कारण तालाब की उंचाई कम बनाई गई और 41 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता कम हो गई थी। इसके अलावा घटिया निर्माण के कारण नहर के गेट के नीचे जमीन व दीवारों में बड़े-बड़े होल हो गए थे। वर्तमान में तालाब से सिर्फ 25 से 30 हेक्टेयर की सिंचाई सिर्फ बहते पानी की जाती है, नहर से पानी खेतों में नहीं पहुंचता है जबकि नियमानुसार तलाब का निर्माण होने पर जब से क्षमता के हिसाब से पानी तलाब में भरा जाता है उस साल के 5 साल बाद से ही तालाब के रख रखाव में राशि खर्च करने का प्रावधान है। शासन द्वारा निर्धारित समय सीमा की गणना की जाए तो 2020 के बाद ही रख रखाव में राशि खर्च की जानी चालू होती लेकिन लालपानी का तालाब पहली साल से क्षतिग्रस्त हो गया था यहां तक कि तालाब की नहर तक पानी पहुंचाने के लिए विभाग ने तालाब के अंदर जेसीबी से ही नाली खोदी थी। ऐसा नहीं है कि विभाग के अधिकारियों को लालपानी तालाब के घटिया निर्माण की जानकारी नहीं पिछले 5 सालों मेंं रहे उपयंत्री, एसडीओ के अलावा ईई को भी जानकारी रही है लेकिन किसी ने कुछ करने का प्रयास नहीं किया है।

जल संसाधन विभाग के एसडीओ एनपी मेहरा से चर्चा की तो उन्होंने बताया कि लालपानी के तलाब की मरम्मत के लिए 65 लाख रुपए का प्राक्कलन तैयार कर विभाग को भेजा गया है। तालाब में प्रारंभ से पानी नहीं रुकता है, ये सही है कि तालाब निर्माण के समय रहे उपयंत्री व अधिकारियों की अनदेखी के कारण तालाब का निर्माण सही नहीं हुआ था।

घटिया निर्माण का असर: विधायक ने उठाया था विधान सभा में मरम्मत का मुद्दा, लेकिन विभाग 70 लाख रुपए खर्च कर कैसे कराए नए तलाब की मरम्मत

तेंदूखेड़ा। बरसात खत्म होते ही तालाब की नहर के गेट तक नहीं पहुंचता पानी।

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