सेंवढ़ा में 6500, जबकि भिंड जिले में 49 हजार 200 हेक्टेयर भूमि की होगी सिंचाई

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दतिया Oct 18, 2018

सेंवढ़ा से आठ किलोमीटर दूर डांग डिरोली में तैयार हो रही की जा रही 2244.97 करोड़ की योजना रतनगढ़ बैराज योजना का लाभ सेंवढ़ा के लोगों को ही सबसे कम होगा। सेंवढ़ा की महज 6500 हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होगी। जबकि पड़ोस के भिंड जिले की 49 हजार 200 हेक्टेयर भूमि को सिंचित किया जाएगा। इसके बाद ग्वालियर की 22784 हेक्टेयर कृषि भूमि को सूखे की समस्या से निजात मिलेगी। इस लिहाज से परियोजना को भले ही सेंवढ़ा में शुरू किया गया हो, लेकिन लाभान्वित दूसरे जिलों को अधिक किया गया।

परियोजना को लेकर बीते पांच साल से जल संसाधन विभाग होमवर्क कर रहा है। परियोजना के जरिए सरकार किस प्रकार अपने पक्ष में माहौल पैदा करना चाहती है इसका एक उदाहरण परियोजना के शुभारंभ समारोह के दिन भी देखने को मिला। आचार संहिता लगने के ठीक 22 घंटे पहले संपन्न हुए इस कार्यक्रम को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए सीएम ने संबोधित किया। जल संसाधन मंत्री नरोत्तम मिश्रा स्वयं माइक लेकर मंच का संचालन करते देखे गए।

बांध बनने के बाद 24 ग्रामों की कुल 3337.63 हेक्टेयर जमीन डूब जाएगी। इसमें निज स्वामित्व की 1302.79 हेक्टेयर, राजस्व की 1235.35 हेक्टेयर तथा वन विभाग की 799.59 हेक्टेयर कृषि भूमि शामिल है। सेवढ़ा तहसील के ढीमरपुरा, खमरोली, मेढ़पुरा, डोंगरपुर, धुबियायी एवं मड़ीखेड़ा ग्राम डूब में आएंगे। इनमें अकेली खमरोली पंचायत के 5 ग्राम शामिल हैं। इन ग्रामों में रहने वाले 766 परिवारों के विस्थापन एवं पुनर्वास हेतु स्थान का चिह्नांकन होना है। परियोजना से 9 मेगावाट बिजली का उत्पादन करने की भी योजना विभाग की है।

भूमि पूजन के साथ ही 464.53 करोड़ की लागत से बांध का निर्माण प्रारंभ हो गया है। 1162 मीटर मिट्टी एवं 578 मीटर पक्के स्ट्रेक्चर के साथ बनने वाला यह बांध 31 मीटर ऊंचा बनेगा। इसकी लंबाई 1740 मीटर तथा चौड़ाई 7.50 मीटर रहेगी। इसमें 29 गेट लगेंगे। इसका जल ग्रहण क्षेत्र 12739 वर्ग मीटर होगा। इसकी जल ग्रहण क्षमता 247 मिलियन घन मीटर रहेगी।

यह परियोजना भले ही दतिया जिले की सेंवढ़ा तहसील में बन रही है पर इसका कार्य ग्वालियर जिले की डबरा तहसील में पदस्थ जल संसाधन विभाग के डिवीजनल स्तर के अधिकारी की देखरेख में सम्पन्न होगा। जल संसाधन विभाग दतिया के डीई एनपी बाथम के अनुसार परियोजना के लिए अधिकतम 3 वर्ष का वक्त निर्धारित है। फिलहाल सभी प्रकार की निविदाओं में 24 माह की समय सीमा दी गई है।

डांग डिरोली, जहां तैयार होगी रतनगढ़ बैराज परियोजना।

233 ग्रामों को होगा लाभ, गोहद विस को सबसे ज्यादा

परियोजना से सर्वाधिक लाभ गोहद विधानसभा क्षेत्र को होगा। इसके 90 ग्रामों में पानी पहुंचाया जाएगा। इसके अलावा मेहगांव के 65 ग्रामों को भी इसका लाभ मिलेगा। भिंड जिले के इन दोनों विधानसभा क्षेत्र की कुल 49200 हेक्टेयर कृषि भूमि के सूखे की समस्या समाप्त होगी। तीसरे नंबर पर सबसे बड़ा लाभ ग्वालियर जिले की डबरा तहसील को होगा। कुल 37 गांव इससे प्रभावित होंगे। वहीं ग्वालियर ग्रामीण के 24 ग्रामों को मिलाकर ग्वालियर जिले की 22784 हेक्टेयर कृषि भूमि को नहर के जरिए पानी मिलेगा। दतिया जिले की सेंवढ़ा तहसील के 17 ग्रामों की 6500 हेक्टेयर कृषि भूमि को भी इसका लाभ मिलेगा।

परियाेजना का नाम बदला और दायरा भी बढ़ाया

2010 में सेंवढ़ा के सूखा प्रभावित 18 ग्रामों को सिंचित करने के लिए सनकुआं उद्वहन परियोजना की घोषणा की गई। सीएम शिवराज सिंह के घोषणा क्रमांक 1022 के साथ लाखों रुपए के बोर्ड लगे और अंततः कार्य प्रारंभ होने के पहले ही उसे तकनीकी स्वीकृति के अभाव में रोक दिया गया। 2013 में इस सूखा प्रभावित 18 ग्रामों के 28 मतदान केंद्रों में से 24 में भाजपा को हार मिली। 2013 के अंत में चुनाव होने के तत्काल बाद से ही सरकार योजना के प्रति गंभीर हो गई। हॉलैंड की तकनीक से डेम बनाने का प्लान हुआ। परियोजना का नाम सिंध बैराज रखा गया और इससे 40 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित करने का लक्ष्य रखा गया। उस वक्त इसकी लागत 1623 करोड़ थी। तीन वर्ष से यह परियोजना कागजों में डोल रही थी। इस बीच मेहगांव, गोहद एवं ग्वालियर ग्रामीण के विधायकों ने अपने अपने क्षेत्र के सूखा प्रभवित क्षेत्र को जोड़ने का प्रयास किया। और अंतत: परियोजना की प्रशासकीय स्वीकृति 26 जून 2018 को जल संसाधन विभाग ने जारी की गई परियोजना का नाम बदल कर मां रतनगढ़ बहुउद्देशीय परियोजना रखा गया। और इससे 78 हजार हैक्टेयर कृषि भूमि जोड़ कर पांच विधानसभा क्षेत्रों को संतुष्ट करने का प्रयास हुआ।

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