उनाव : नरवाई जलाने से बाज नही आ रहे किसान, भूमि की उर्वरता पर पड़ रहा प्रतिकूल प्रभाव

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उनाव May 02, 2019

खेतों में हुई हार्वेस्टिंग के बाद शेष बची नरवाई में किसान नियमों एवं कायदों की अनदेखी कर आग लगा रहे हैं। शाम ढलते की गांव-गांव में नरवाई में आग सुलगने से तापमान में बढ़ोत्तरी होने के साथ ही भूमि की उर्वरता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसके अलावा खेतों के आसपास बनी मेड़ पर खड़े हरे भरे पेड़ भी आग में झुलसने के कारण असामयिक नष्ट हो रहे हैं। नरवाई में आग लगने से होने वाले नुकसान के प्रति शासन का कृषि कल्याण विभाग भी समस्या के प्रति चुप्पी साधे हुए है, जिससे किसान बेखौफ होकर नरवाई जला रहे हैं। जबकि शासन ने नीति बनाकर यह शर्त जोड़ी थी कि हार्वेस्टिंग मशीन के प्रयोग के साथ ही नरवाई से भूसा बनाने के लिए री पर चलवाना आवश्यक होगा। साथ ही साथ नरवाई जलाने वाले किसानों पर कार्रवाई करने के स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।

इस साल अंचल में रबी की फसलों में बडी मात्रा गेहूं की बंपर पैदावार हुई है। मार्च एवं अप्रैल माह में गेहू की कटाई के दौरान किसानों ने अपनी फसल की कटाई हार्वेस्टर के द्वारा कराई थी खेतों में हार्वेस्टिंग के उपरांत फसल का तना बाला भाग खेतों में ही छूट जाता है कई किसान इस छूटे डंठलों का रीपर द्वारा भूसा भी तैयार कर लेते हैं। शेष किसान खेतों की सफाई के नाम पर इसमें आग सुलगा देते हैं, यही आग एक दूसरे के खेतों में पहुंचकर विकराल रूप धारण कर लेती है। आग लगने से भूमि को उपजाऊ बनाने बाले जैविक एवं अजैविक घटक नष्ट हो जाते हैं। साथ ही खेत खलियान के आसपास लगे पेड़ पौधे भी आग की चपेट में आने से अपना जीवन नष्ट कर देते हैं। जिससे पर्यावरण पर भी खतरा मंडरा रहा है इन सब नुकसान को रोकने के लिए जिम्मेवार कृषि एवं वन विभाग नरवाई में लगाई जा रही आग को रोकने में नाकामयाब नजर आ रहा है जबकि कानूनी प्रावधानों की जानकारी देकर किसानों को जागरूक करने की दिशा में कोई प्रभावी पहल की जा सकती थी। लेकिन विभाग के अमले के प्रयास बेअसर दिखाई दे रहे हैं।

ग्रामीणों को समझा रहे 

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