मंडी परिसर में बिजली, पानी की खुद व्यवस्था कर रहे व्यापारी

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धार Nov 11, 2018

नगर की अनाज मंडी में किसानों एवं व्यापारियों की समस्याएं खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। पहले तो स्वच्छता अनाज मंडी का मुख्य मुद्दा था। परंतु मंडी व्यापारियों के यहां आए दिन चोरी की घटनाओं का होना भी बड़ी समस्या है। मंडी प्रांगण में मंडी कार्यालय द्वारा रोशनी के लिए स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था तक नहीं की है। व्यापारी रोशनी की व्यवस्था स्वयं के खर्च से अलग-अलग जगहों पर लैम्प लगाकर करते हैं। पीने के पानी की व्यवस्था भी हर व्यापारी अपने जेब से पैसा खर्च कर किसानों तथा आम नागरिकों के लिए करतेे हैं। इसी तरह चौकीदारी भी मंडी प्रांगण में व्यापारी अब निजी पहरेदार रखकर अनाज की रखवाली करते हैं क्योंकि आए दिन चोरी होने का खतरा बना रहता है।

मंडी में स्वीपर तथा चौकीदारों की भर्ती की गई है परंतु न तो वे शौचालय साफ करते है और न ही मंडी प्रांगण में चौकीदारी होती है। हर महीने व्यापारी लाखों रुपए का टैक्स मंडी प्रशासन को चुकाते हैं। अगर उपज बेचने के लिए महिला किसान आ जाए तो उन्हें टायलेट के लिए बस स्टैंड जाना पड़ता है। कागजों में मंडी प्रशासन किसानों और व्यापारियों को सुविधाएं देना दर्शाता है लेकिन वास्तविकता में धरातल पर कुछ भी नजर नहीं आता है। व्यापारी एवं किसान विभिन्न मांगों को लेकर मंडी प्रशासन को अवगत करा चुके है। परंतु मंडी प्रशासन द्वारा किसी मांग के संदर्भ में कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है। भावांतर योजना के तहत प्रतिदिन 500 किसान अपनी उपज लेकर मंडी पहुंचते है व दिनभर धूप में खड़े रह कर अपनी उपज बिकने का इंतजार करते रहते है। परंतु मंडी उन्हें छांव भी उपलब्ध नहीं करवा पाती हैं।

धाेबीघाट के समीप पुलिया का काम चार माह बाद भी शुरू नहीं हुआ

राजगढ़ | झाबुआ की और जाने वाले मार्ग पुराने इंदौर-अहमदाबाद हाईवे के अंतर्गत धोबीघाट के समीप के पुल को करीब 4 माह पहले तोड़ दिया गया था। जिससे ग्रामीणों को राजगढ़ आने के लिए अब नए फोरलेन से होकर करीब 3 किमी घुमकर आना पड़ रहा है। इससे नगर के व्यापार पर भी विपरीत असर पड़ा है। ठेकेदार द्वारा कार्य अत्यंत धीमी गति से चलाया जा रहा है। जिसके कारण बेवजह नागरिकों एवं ग्रामीणों के साथ बस चालकों को भी परेशानी उठाना पड़ रही हैं। नए फोरलेन पर गलत साइड से वाहनों की आवाजाही हो रही है जो कभी भी दुर्घटना का कारण बन सकती है। लेकिन न तो पीडब्ल्यूडी विभाग और नहीं प्रशासन इस और ध्यान दे रहा हैं। नगर में इस मार्ग के सीमेंटीकरण का कार्य भी कई महीनों पहले पूरा हो जाना था लेकिन ठेकेदार की लापरवाही एवं विभाग की ढिलपोल के कारण अब तक कार्य नहीं हो सका हैं। सरकारी अस्पताल से लेकर कुक्षी नाका तक की सड़क की स्थिति बद से बदतर हो चूकी हैं दिनभर इस मार्ग पर काफी यातायात होने से नागरिकों को उड़ती धूल के बीच से वाहन निकालने के लिए मजबूर होना पड़ रहा हैं। विभाग के अनुसार दिसंबर तक की कार्यावधि ठेकेदार को दी गई है। अब करीब डेढ़ माह के समय में ठेकेदार कार्य पूर्ण कर पाता है या नहीं।

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