अधिक वर्षा से हल्दी की फसल को नुकसान

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इंदौर Oct 30, 2019

हल्दी की फसल का सही अनुमान सामान्य मौसम रहने पर ही लगाया जा सकता है। वर्षा कम या अधिक होने पर नहीं। इस वर्ष वर्षा कुछ क्षेत्रों में अधिक मात्रा में हो रही है। इससे नुकसान भी हो सकता है। वस्तु बाजारों में ग्राहकी कमजोर है। वायदा वालों ने हल्दी के हाजर कारोबार को बुरी तरह से पीटकर रख दिया है। छोटे से छोटा खेरची व्यापारी भी वायदे को देखकर खरीदी करते हैं।

पिछले महीनों में पता नहीं सटोरियों को मंदी ही मंदी नजर आ रही थी। अत: हल्दी में हाजर में मांग एकदम बैठ गई थी। खेरची व्यापारियों की खरीदी काफी सीमित मात्रा में हो गई थी। देखना यह है कि दीपावली बाद मंदी वाले सटोरिए क्या रुख अपनाते हैं। फसल आने में अभी लंबा समय है। वैवाहिक सीजन शुरू हो रहा है। जिसमें हल्दी पावडर की खपत बढ़ जाया करती है।

आने वाले दिनों में तेलंगाना, महाराष्ट्र में वर्षा बंद नहीं हुई तो फसल को बड़ा नुकसान भी हो सकता है। इससे पूरी बाजी पलट जाएगी। पिछले दिनों आंध्र, तेलंगाना, महाराष्ट्र, तमिलनाडु जैसे हल्दी उत्पादक राज्यों में दीपावली पूर्व की त्योहारी ग्राहकी कमजोर रही। वस्तु बाजारों में कमजोर मांग न केवल उत्तर भारत में कम देखी जा रही है, वरन् पूर्वी भारत एवं पश्चिम बंगाल की हालत भी यही। आम व्यक्तियों के हाथों में रुपया नहीं है, इससे भी हल्दी जैसी जिंस में भी मांग कम रही।

तेलंगाना एवं महाराष्ट्र में रुक-रुककर हो रही वर्षा से फिलहाल तो फसल को लाभ मिलेगा, यदि अधिक वर्षा होती है, तो 2019-20 में कितनी फसल होगी इसका अनुमान लगाना कठिन हो सकता है। मानसून की विदाई के बाद असल में अंदाज लग सकेगा। पिछले दिनों त्योहारी की वजह से निजामाबाद, केसमुद्रम, सदाशिवपेठ, डुुग्गीराला, नांदेड़ आदि में आवक कमजोर रही थी।

धनिए के प्रति रुझान कम: पिछले दो वर्षों में गुजरात एवं राजस्थान में धनिए की बोवनी का रकबा घटता जा रहा है। इसके पीछे विदेशों से आयात होने से किसानों और स्टॉकिस्टों को लाभकारी मूल्य नहीं मिलना भी है। धनिए की फसल जोखिमभरी होती है। अत: अनेक किसानों की रुचि कम होने लगी है।

धनिया उत्पादक राज्यों में अक्टूबर अंत तक वर्षा होने से बोवनी में करीब 1 माह से अधिक की देरी हो सकती है। इससे हाजर एवं वायदे में लगातार आ रही मंदी पर ब्रेक लग सकता है। वैसे अच्छी वर्षा के बाद वायदा वालों ने पहली ही बड़ी मार दी थी। इससे स्टॉकिस्टों का मनोबल टूटा है। अधिक ठंड में धनिया एवं चने की फसल जोखिम भरी होती है। ऐसी धारणा के बाद स्टॉकिस्टों की बेचवाली रुकने की संभावना व्यक्त की जा रही है। वर्ष 2016-17 से राजस्थान में धनिए की बोवनी में कमी होती जा रही है। विदेशी आयात से घरेलू स्टॉकिस्टों में चिंता व्याप्त है।

राजस्थान में वर्ष 2017-18 में 1.81 लाख, 2017-18 में 1.43 लाख हेक्टेयर में बोवनी हुई थी। इसी तरह गुजरात में 2016-17 में 1.21 लाख एवं 2017-18 में 1.16 लाख हेक्टेयर में बोवनी हुई थी।

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