फायदेमंद खेती के लिए सरसों की बुआई 25 अक्टूबर के बीच करें, बाद में करने पर घटता है फसल उत्पादन: गुजरे

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शिवपुरी | Oct 10, 2018

जिले में रबी सीजन के लिए किसानों को 40 हजार क्विंटल डीएपी खाद की आवश्यकता है। लेकिन अभी तक सहकारी संस्थाओं पर एक क्विंटल खाद भी नहीं आया है। जिले के तीनों ब्लॉक में डीएपी खाद की किल्लत के चलते किसान सरसों की बोवनी नहीं कर पा रहे हैं। सहकारी संस्थाओं पर खाद के लिए किसान चक्कर काट रहे हैं। मार्केटिंग सोसाइटी द्वारा गोदामों में रखा एक साल पुराना डीएपी खाद खपाने का प्रयास किया जा रहा है। यह पुराना खाद पत्थर की तरह जमने के कारण किसान लेने को तैयार नहीं है। डीएपी खाद की भारी किल्लत के चलते सरसों की बोवनी का काम पिछड़ने के आसार देखते हुए किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। बड़ौदा, कराहल , विजयपुर और मानपुर में डीएपी खाद के लिए किसानों के बीच आंदोलन की सुगबुगाहट है। उधर मार्केटिंग सोसाइटी के जिला प्रबंधक ने डीएपी खाद की रैक जल्द आने की बात कही है।

चालू रबी सीजन में कृषि विभाग ने 1 लाख 59 हजार हेक्टेयर में बोवनी का लक्ष्य रखा है। इसके लिए कृषि विभाग ने कुल 40 हजार क्विंटल डीएपी खाद की डिमांड बताई है। लेकिन मार्केटिंग सोसाइटी पर अभी तक डीएपी खाद उपलब्ध नहीं हुआ है। डीएपी खाद की किल्लत से सर्वाधिक परेशानी उन किसानों को हो रही है जिन्होंने सरसों की बोवनी के लिए अपने खेत तैयार कर लिए हैं। सरसों के बीज के साथ डीएपी खाद मिलाकर किसान खेतों में बोवनी करते हैं। बोवनी के लिए किसानों ने बीज का बंदोबस्त तो कर लिया है, लेकिन सहकारी संस्थाओं पर डीएपी खाद नहीं मिलने के कारण बोवनी का काम शुरू नहीं कर पा रहे हैं। विजयपुर, कराहल और वीरपुर में सहकारी संस्थाओं पर डीएपी खाद आने की उम्मीद में सैकड़ों किसान 15 दिन से चक्कर काट रहे हैं। इन संस्थाओं पर एक भी कट्‌टा खाद नहीं है। किसानों का कहना है कि खाद के इंतजार में सरसों की बोवनी का उपयुक्त समय निकलता जा रहा है। एक एक दिन किसानों पर भारी पड़ रहे हैं। सरसों की बोवनी बिगड़ने की आशंका निर्मित होने से किसानों की बेचैनी बढ़ती जा रही है।

सरसों की बोवनी के लिए खेत हांकता किसान।

गोदामों में रखा एक साल पुराना तीन हजार कट्‌टा डीएपी खाद जमा

चालू रबी सीजन के लिए डिमांड के बावजूद मार्केटिंग सोसाइटी पर डीएपी खाद की रैक नहीं आई है। विपणन संघ के गोदामों में बीते साल का करीब 3000 क्विंटल डीएपी खाद रखा है । यह खाद एक साल पुराना होने की वजह से पत्‍थर की तरह जम गया है। सहकारी संस्था प्रबंधक यही पुराना खाद खपाना चाहते हैं। लेकिन किसान इस खाद को लेने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि खाद पुराना होने की वजह से पत्थर की तरह जमने के अलावा उसकी गुणवत्ता भी खराब हो चुकी है। इसलिए फसल में काम नहीं करेगा। हालांकि संस्था के अधिकारियों का दावा है कि पुराना डीएपी खाद गुणवत्ता मानक पर खरा है। जिले में सहकारी संस्थाओं की 47 शाखाओं के माध्यम से सदस्य किसानों को खाद-बीज उपलब्ध कराया जाता है। इन सभी 47 सोसाइटी द्वारा एक महीने पहले डिमांड भेजने के बावजूद डीएपी नहीं पहुंचा है। जिससे किसानों में असंतोष पनपता जा रहा है। कराहल एवं वीरपुर में किसान डीएपी खाद के लिए आंदोलन का मन बना रहे हैं।

 

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