पहली बार राशन की तरह बंट रहा यूरिया, प्रति हेक्टेयर मिलेंगी 5 बोरियां, जबकि पिछले साल से 8 हजार हेक्टे. रकबा ज्यादा

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गुना/मधुसूदनगढ़ Dec 20, 2019

यूरिया को लेकर अभी से संकट की आहट सुनाई देने लगी है। समय रहते अगर ध्यान नहीं दिया तो मुसीबत खड़ी हो सकता है। इस सीजन का पहला प्रदर्शन मंगलवार को मधुसूदनगढ़ में यूरिया को लेकर हुआ। किसानों में इतना गुस्सा था कि उन्होंने जाम लगा दिया।

पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। इसके बाद किसान शांत हुए। उन्हें भरोसा दिलाया कि समय पर खाद मिलेगा, कालाबाजारी रोकी जाएगी। इसके लिए अब थाने के सामने से यूरिया का वितरण होगा। उधर कृषि विभाग ने भी पत्र जारी कर चिंता जताई है, कहा है कि इस बार रकबा बढ़ने से अभी से यूरिया की कमी महसूस होने लगी है। इसलिए समस्त सहकारी समिति, डबल लॉक केंद्र और निजी विक्रेताओं से कहा है कि वह प्रति हेक्टेयर 5 बैग ही यूरिया के किसानों को दें। इसके लिए पीओएस मशीन का इस्तेमाल किया जाए, ताकि रिकॉर्ड उपलब्ध रहे कि किस किसान ने कितना माल खरीदा है।

कमी या फिर बहाना: कृषि विभाग ने कहा कि प्रति हेक्टेयर 5 बोरी लगती हैं, पर किसान 7 बोरी डाल रहे हैं

क्यों आया संकट

यूरिया का संकट के पीछे की वजह अचानक मांग का बढ़ना बताया जा रहा है। वहीं कृषि और विपणन संघ के अपने-अपने दावे हैं। कृषि विभाग का कहना है कि इस बार रकबा बढ़ा है। इसलिए इसकी ज्यादा मांग है। वहीं विपणन संघ का कहना है कि किसान अधिक यूरिया का इस्तेमाल कर रहे हैं। जबकि 1 हेक्टेयर में 5 बैग की लगते हैं, लेकिन 7 तक इस्तेमाल हो रहे हैं। पूरे प्रदेश में इसकी मांग है, लेकिन फैक्टरी में इस हिसाब से उत्पादन नहीं हो पा रहा है।

कालाबाजारी भी शुरू

मधुसूदनगढ़ में कालाबाजारी की आशंका से किसान परेशान हैं। उनका कहना है कि 345 रुपए प्रति बैग यूरिया बेचा जा रहा है। जबकि इसकी सरकारी कीमत 267 रुपए है। सोमवार दोपहर बाद से ही मधुसूदनगढ़ के किसानों को यूरिया नहीं मिला, इससे वह चिंतित नजर आए। मंगलवार काे उन्होंने सुबह 9 बजे ही गुना बायपास रोड पर जाम लगा दिया था, तहसीलदार ने उन्हें समझाया। कालाबाजारी की आशंका के चलते अब थाने के सामने यूरिया बांटा जाएगा।

कृषि विभाग ने कहा-घबराएं नहीं, सभी को मिलेगा खाद

कृषि विभाग उप संचालक श्री उपाध्याय ने किसानों से कहा है कि वह घबराएं न सभी को खाद मिलेगा। अभी जितनी जरूरत है, उतनी ही लें। एकत्रित करके न रखें। बाद में जब भी जरूरत पड़ेगी यूरिया उपलब्ध रहेगा। पहले चरण में जो खाद लगती है, उतनी ही खरीदें। जनवरी माह तक खाद वितरण होना है।

जिले में प्लांट पर दिल्ली तक पहुंचता है ऑर्डर, तब मिल पाती है अनुमति

जिले की 3 तहसीलों में खाद की मांग का ऑर्डर पास कराने के लिए दिल्ली तक फाइल चलती है। इसमें मधुसूदनगढ़, आरोन और बमोरी तहसील शामिल हैं। इन जगहों के लिए यूरिया का मांग का प्रस्ताव भोपाल से दिल्ली पहुंचता है। इसमें कई दिन का समय लगता है। वहीं अन्य तहसीलों के लिए ऑर्डर भोपाल से ही पास हो जाता है। विभाग ने अब पहले से ही मांग पत्र भेजना शुरू कर दिया है। ताकि समस्या पैदा न हो।

चिंता इसलिए क्योंकि अच्छी बारिश से इस बार गेहूं का रकबा बढ़ा

इस बार कृषि विभाग चिंतित है। क्योंकि विभाग ने पिछले साल में जितनी बोवनी हुई थी, उसी हिसाब से पूरी प्लानिंग तैयार की थी। लेकिन गेहूं की अच्छी फसल होने की वजह से किसानों का इसमें भरोसा बढ़ा। पिछली बार 1 लाख 60 हजार हेक्टेयर में बोवनी हुई थी। लेकिन इस बार यह बढ़कर 1 लाख 68 हजार हेक्टेयर के आसपास पहुंच गई है। पिछली बार 31 हजार मीट्रिक टन यूरिया से काम चल गया था, लेकिन अब 38 हजार मीट्रिक टन की जरूरत पड़ेगी।

यह है स्थिति : जिले में अभी सिर्फ 3 हजार मीट्रिक टन यूरिया मौजूद है। जबकि मांग इससे दोगुने से ज्यादा की है। अब तक 18 हजार मीट्रिक टन वितरित हो चुका है। विपणन संघ ने 4500 मीट्रिक टन की मांग भेजी थी, लेकिन पूर्ति आधी ही हो पाई है।

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