इल्लियों का प्रकोप : बारजा के बाद अब कालपी के किसानों ने मक्का फसल बखरी

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रहटगांव/टिमरनी Dec 20, 2019

मक्का फसल में इल्लियों का प्रकोप कम नहीं हो रहा है। हजारों रुपए लीटर महंगे कीटनाशकों का स्प्रे करने के बाद भी फसल में सुधार नहीं हो रहा है। इसके अलावा किसानों ने कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से तकनीकी जानकारी भी नहीं मिल रही है।

इस कारण किसान चाहकर भी फसलों को बीमारियों से नहीं बचा पा रहे हैं। कालपी के किसान कमलेश उन्हाले व कंचन गुर्जर ने बुधवार को 4 एकड़ की फसल पर कल्टीवेटर चला दिया। किसानों ने बताया कि मक्का फसल में इल्लियां लग गई थी इसलिए बक्खर दी। कमलेश ने बताया कि करीब 60 हजार की लागत लगाने के बाद फसल को बखरना पड़ा।

आर्थिक तंगी है। आगे की बोवनी कैसे करूं यह समझ नहीं आ रहा है। किसान ने प्रशासन से आर्थिक मदद की मांग की। इसी तरह बारजा के किसान गौरव गद्रे ने 24 नवंबर को 25 एकड़ की मक्का फसल बखर दी थी। किसान ने बताया कि नवंबर को मक्का की बोवनी की थी। प्रति एकड़ 8 किलो बीज डाला। करीब 1.5 लाख की लागत आई। मक्का फसल का अंकुरण शुरू होने के साथ ही बीमारी इल्लियां लग गई। कृषि वैज्ञानिक फाल आर्मी वर्म बीमारी बता रहे हैं। इल्लियां पौधे के पत्तों को छलनी कर देते हैं। किसान ने बताया कि मक्का फसल में बीमारी लग रही है पर कृषि विभाग मौन है। वह किसानों को तकनीकी जानकारी उपलब्ध नहीं करा रहा है।

मालूम हो, मक्का फसल में बीमारी लगने के बाद मंडी में बिकने के लिए आने वाली मक्का उपज के भाव में तेजी आ गई है। इस संबंध में कृषि विज्ञान केंद्र हरदा के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसके तिवारी का कहना था कि किसान मक्का में बीमारी दूर करने कीटनाशकों का स्प्रे करें। विभाग कैंप लगाकर किसानों को जागरूक कर रहा है।

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