दिवाली की छुटि्टयों के बाद कृषि उपज मंडी में धान की आवक शुरू, दामों में आया उछाल

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होशंगाबाद Nov 12, 2018

भाईदूज के बाद से कृषि उपज मंडी में धान की आवक शुरू हो गई है। मंडी में धान रखने एवं किसानों के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए तैयारियां कर ली गई हैं। कृषि मंडी सचिव नरेश परमार ने बताया 50 हजार क्विंटल धान की आवक की संभावना है। किसानों को परेशानी न हो इसके लिए रविवार को मंडी परिसर में किसानों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 6 से ज्यादा नल मंडी प्रशासन ने लगवा दिए गए हैं।

कृषि उपज मंडी पिपरिया में धान की आवक काफी दिन पहले से हो गई थी और रोजाना 25 हजार क्विंटल के आसपास धान की आवक हो रही थी। दीपावली के बाद पड़ी छुट्टियों में धान की आवक पर ब्रेक लगा लेकिन दूज की पूजन हो जाने के बाद अब सोमवार को जब मंडी खुलेगी तब धान की बंपर आवक होने की संभावना जताई जा रही है। मंडी सचिव परमार ने बताया मंडी के बाहरी हिस्से में जो शेड बने हुए हैं वहां पर धान की नीलामी होती है। उन्होंने बताया 12 से 14 शेड पर धान की ट्रालिया लग सकती हैं इसके अलावा अगर और जरूरत पड़ती है तो उसके भी हमने इंतजाम कर दिए हैं।

धान की बंपर आवक की संभावना को देखते हुए मंडी प्रशासन ने शनिवार और रविवार के दिन भर बाहर वाले शेड पर काम करवाया। जेसीबी मशीन बुलाकर गेहूं स्टोरेज प्वाइंट के आसपास सफाई करवाई गई है। वहां पर ट्राली खड़ी की जा सकती हैं। मंडी सूत्रों ने बताया गत वर्ष के आंकड़े बताते हैं दूज के बाद धान की अच्छी आवक होती है। इस समय धान के रेट भी अच्छे मिल रहे हैं यही कारण है कि माना जा रहा है कि किसान बड़ी मात्रा में धान लेकर आएंगे। ज्ञात हो पिपरिया बनखेड़ी क्षेत्र में किसानों ने बड़े पैमाने पर धान लगाई है। पिपरिया में पिपरिया अंचल के साथ ही आसपास के जिलों से भी धान लाई जाती है। पिपरिया मंडी में रेट अच्छे मिलने के कारण आसपास के किसान यहां धान बेचने के लिए आते हैं।

पिपरिया। मंडी में किसानों के लिए पानी के नल सुधारते हुए कर्मचारी।

आधा दर्जन से ज्यादा नल मंडी में अलग-अलग जगह लगाए

मंडी परिसर में आज किसानों के लिए पेयजल हेतु नलों की व्यवस्था कर दी गई है। मंडी सचिव परमार ने बताया आधा दर्जन से ज्यादा नल मंडी में अलग-अलग जगह लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा क्योंकि अभी यह निर्माण धीन एरिया है इसीलिए पेयजल व्यवस्था का कोई उपाय नहीं सोचा गया था लेकिन धान सहित कुछ अन्य अनाज का यहां पर भी कारोबार होने लगा है इसीलिए मंडी की ओर से यहां नलों की व्यवस्था की जा रही है।

जुलाई से बंद है कृषि मंडी की कैंटीन

कृषि मंडी की कैंटीन जुलाई से बंद है। ठेकेदार ने मंडी कार्यालय में कैंटीन का किराया जमा न करने से मंडी प्रशासन ने कैंटीन बंद करवा दी। प्रशासन कैंटीन को फिर से खुलवाने के लिए नीलाम करेगा। इसके लिए मंडी बोर्ड से अनुमति मांगी है। कैंटीन प्रमोद पालीवाल ने 6 लाख 36 हजार रुपए वार्षिक किराए पर तीन साल के लिए नीलामी में मिली थी। इस का किराया 53 हजार रुपए मासिक बनता है। अमानत राशि के रूप में मंडी प्रशासन ने 60 हजार रुपए की राशि जमा करवाई थी। फरवरी 2017 से तीन साल के लिए दी गई लेकिन प्रशासन को दिसंबर 2017 तक का किराया मिला। इसके बाद जनवरी 2018 से ठेकेदार ने किराया नहीं दिया। मंडी प्रशासन ने ठेकेदार को किराया भुगतान के लिए पत्र दिया लेकिन उसके बाद भी किराया जमा नहीं किया। इसके बाद मंडी प्रशासन ने जुलाई महीने से कैंटीन का ठेका निरस्त कर दिया। मंडी प्रशासन ने बताया ठेकेदार पर तीन लाख 45 हजार रुपए का किराया बाकी था। इस किराए की एवज में ठेकेदार ने मंडी को तीन लाख का चेक दिया। मंडी प्रबंधन के अनुसार चेक बैंक में लगा दिया लेकिन राशि का भुगतान होगा या नहीं यह सोमवार को पता चलेगा।

नीलामी प्रक्रिया शुरू होगी 

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