डिफाल्टर किसानों को डबल लॉक से बेचा डेढ़ करोड़ रुपए का खाद

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होशंगाबाद Nov 27, 2018

इन दिनों पचमढ़ी रोड स्थित डबल लाॅक गोदाम पर किसानों की भीड़ लगी हुई है और ट्रॉलियों की लंबी कतार पचमढ़ी रोड पर नजर आ रही हैं। किसान गोदाम से सीधे खाद की खरीदारी कर रहे हैं। डबल लाॅक गोदाम प्रभारी संजीत बर्मन ने बताया कि एक नवंबर से अभी तक लगभग डेढ़ करोड़ रुपए का खाद बेचा जा चुका है। गोदाम में यूरिया, डीएपी, सुपर फास्फेट और पोटाश किसानों को दिया जा रहा है।

किसानों को यह सब सामान सोसाइटी से भी मिल रहा है इसके बाद भी किसान डबल लाॅक और बाजार से खाद ले रहे हैं इसका कारण किसानों द्वारा सोसाइटी का पिछला बकाया न चुकाना है। सोसाइटी ने ऐसे सदस्यों पर अंकुश लगा दिया है। कुछ किसानों का कहना है की सोसाइटी से उन्हें जितना खाद चाहिए उतना नहीं मिल पा रहा है इसलिए वे दूसरी जगह से खाद ले रहे हैं। डबल लाॅक प्रभारी संजीव बर्मन के अनुसार सोसाइटी की लिमिट कम होने की वजह से वे बहुत ज्यादा माल नहीं ले जा पा रही हैं। सोसाइटी जितना खाद ले जाती है वह कोशिश करती है कि उसके सभी सदस्यों को वह खाद मिल सके। इसके लिए माल की उपलब्धता के आधार पर कोटा तय कर दिया जाता है जबकि किसान कोटे के लिए इंतजार के मूड में नहीं है।

इसलिए कहते हैं डबल लॉक गोदाम

मध्य प्रदेश राज्य विपणन संघ के पिपरिया कार्यालय को किसान डबल लॉक गोदाम कहते हैं। इस कार्यालय को डबल लाख कहने के पीछे बड़ी मजेदार बात छुपी है। प्रभारी बर्मन ने बताया कि पहले विपणन संघ का जो भी खाद अनाज बीज होता था वह वेयरहाउस के गोदामों में रखा जाता था। उसकी सुरक्षा के लिए दो तालों का सिस्टम होता था। एक ताला वेयरहाउस वाले लगाते थे और दूसरा ताला हमारा होता था। जब दोनों अधिकारी पहुंच जाते थे तब उस ताले को खोला जाता था, इसलिए वह डबल लाॅक गोदाम होती थी। बाद के समय में विपणन संघ की अपनी गोदाम बन गई हैं और अब अनाज और बीज खाद यहीं रखा जाता है। अब ताले हमारे ही लगते हैं, लेकिन किसानों के मुंह पर डबल लॉक गोदाम शब्द जो चढ़ा है तो वह डबल लाॅक गोदाम ही कहते हैं। उन्होंने बताया कि विपणन संघ के सभी कार्यालयों को सभी जगह किसान डबल गोदाम के नाम से ही पुकारते हैं।

रेट में ज्यादा फर्क नहीं

किसानों ने बताया कि बाजार के दामों में और डबल लाॅक या सोसाइटी के रेट में कोई बहुत ज्यादा फर्क नहीं है। किसान अजय रघुवंशी ने बताया कि सोसाइटी पर जितनी खाद चाहिए उतनी नहीं मिली इसीलिए हम यहां पर खाद लेने के लिए आए हैं। इसी प्रकार से किसान राकेश राय माधव गांव, मिट्ठू लाल रघुवंशी ने बताया कि सोसाइटी के चक्कर बार बार काटने से अच्छा है कि डबल लाक से खाद ले ली जाए। सोसाइटी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि किसान नगद में खाद लेना हो तो चला जाता है, लेकिन सोसाइटी में उधार खाद देने के लिए दबाव बनाता है। कई किसानों पर सोसाइटी की बड़ी राशि लंबित पड़ी हुई है। किसान उसका भुगतान नहीं कर रहे हैं जिसकी वजह से सोसाइटी कर्ज में डूबी हुई हैं। सोसाइटी की लिमिट कम होने के कारण सोसाइटी को जितना खाद मिलता है उतना ले जा रही है।

लिमिट की परेशानी नहीं ना खाद की कमी

क्षेत्र की कृषक सेवा सहकारी समितियों के पर्यवेक्षक प्रमोद पुरोहित ने बताया कि किसी भी सोसाइटी पर खाद की कोई कमी नहीं और हमारे सदस्य भरपूर खाद ले जा रहे हैं। जो कालातीत सदस्य हैं जिन्होंने पिछला बकाया नहीं चुकाया है उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर डिफाल्टर सूची में रख दिया गया है। इन लोगों पर अब समितियां कैसे विश्वास करें इसलिए ये लोग अब समिति में नहीं आते हैं।

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