पटवारी, आरआई, तहसीलदार ने बनाई गलत रिपोर्ट, किसानों का ‌‌Rs. 9 करोड़ बीमा अटका

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होशंगाबाद Oct 29, 2018

मौसम की मार से परेशान किसानों को पटवारी-आरआई द्वारा नुकसान की अनुमानित रिपाेर्ट बनाने के कारण अभी तक बीमा राशि नहीं मिली है। किसानों के बीमा प्रीमियम के साथ प्रदेश और केंद्र सरकार का 9 करोड़ रुपए बीमा कंपनी के पास अटक गए है। केसला ब्लॉक के 250 किसानों को 2015 में खराब हुई खरीफ सीजन की फसल सोयाबीन का बीमा दो साल बाद भी नहीं मिला है। पटवारी, आरआई और एसएलआर की गलत रिपोर्ट के कारण 2015 के खरीफ सीजन में केसला ब्लॉक के 8 हल्कों में धान की फसल को अधिसूचित कर दिया गया। पानी और उपयुक्त जलवायु नहीं होने के कारण क्षेत्र में धान का उत्पादन नहीं के बराबर है। बैंक किसानों से प्रीमियम राशि लेकर बीमा कंपनी को पहुंचा चुकी है। क्षेत्र के 250 किसान वकील रमेश साहू के नेतृत्व में हाईकोर्ट में जाने की तैयारी कर रहे हैं। पीएनबी, आईसीआईसीआई, सेंट्रल ग्रामीण बैंक, देना बैंक, विजया बैंक, एसबीआई, सिंडीकेट बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, प्राथमिक साख सहकारी समिति जमानी-पथरौटा बैंक ने प्रीमियम काटा। उप संचालक कृषि जितेंद्र सिंह ने बताया फसलों के अधिसूचित करने की प्रक्रिया राजस्व विभाग करता है। प्रीमियम बैंक काटते है। यह पटवारी और आरआई की रिपोर्ट से तय होता है।

इन गांवों के किसानों को नहीं मिला बीमा

तीखड़, नयागांव, टांगना, कूकड़ी, तालपुरा, खटामा, मेहंद्रबाड़ी, जमानी, बाबई खुर्द, पीपलढाना, पथरौटा, कुबड़ाखेड़ी, धुगाड़ा, पारछा।

क्या है मामला

ऐसे हुई गड़बड़ी: केसला में धान अधिसूचित हुआ जहां हुई नहीं

पटवारी, आरआई, तहसीलदार क्षेत्र में फसल उत्पादन के अनुसार 100 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में उत्पादित होने वाली फसल की रिपोर्ट एसएलआर को भेजते हैं। एसएलआर प्रशासन को रिपोर्ट देते हैं। कलेक्टर अधिसूचना जारी करते हैं। 2015 खरीफ फसल में गलत रिपोर्ट के कारण धान अधिसूचित हुई, जिसकी उपज हुई ही नहीं थी।

फसल मुआवजा बना आधार

संजय वर्मा ने बताया 2015 में पीला मौजेक के कारण सोयाबीन खराब हुआ। आरबीसी से किसानों को आर्थिक सहायता दी गई। जब फसल नुकसानी का बीमा मांगा तो बीमा कंपनी ने अधिसूचना का हवाला देकर बीमा देने से मना कर दिया।

इन्होंने बनाई रिपोर्ट: किसानों के अनुसार तहसीलदार कबीर खान, पटवारी तीखड़ अनिल गठौले, टांगना अमर राठौर, पीपलढाना लखन इवने, कुकड़ी तालपुरा लोकेश ठाकरे सहित अन्य तत्कालीन आरआई और पटवारियों ने रिपोर्ट बनाई।

अधिसूचना के बाद रिपोर्ट

केसला में सोयाबीन अधिसूचित होने के 5 महीने बाद नायब तहसीलदार ने 1 अक्टूबर 2015 को केसला में 100 हेक्टेेयर से अधिक क्षेत्रफल में सोयाबीन की बुआई की रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस आधार पर किसानों को मुआवजा मिला।

कहां कितनी राशि अटकी

तीखड़

किसान

65

धुरगाड़ा में 35 किसानों का ‌Rs.1 करोड़

पारछा में 6 किसानों का ‌Rs.10 लाख

राशि

राशि

करोड़

करोड़

1.50

1.50

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