धान के कटोरे की 20 सीटों पर सिंचाई और सूखा ही मुद्दा, किसानों के आक्रोश से दावेदार सहमे

0
143

गुढ़ (रीवा)। Oct 21, 2018

विंध्य में कहावत है कि “धान और पान, पानी के मान” यानी पानी ज्यादा होने पर ही इनका उत्पादन होता है पर इस बार हालात बिगड़े हुए हैं। ‘पहिले ऊपर वाला ‘दऊ’ (भगवान) पानी नहीं दिहिस.. बाद में हिंया वाले ‘दऊ’ (सरकार) बिजली नहीं दिहिन.. सलगी धान सूखी जात।’ यह कहते हुए गुढ़ विधानसभा सीट के बदवार गांव की किसान राजकुमारी पटेल की आंखें भर आईं। यह स्थिति उस रीवा और शहडोल संभाग की है, जहां एशिया का सबसे बड़ा 750 मेगावाट का सोलर पावर प्लांट है।

देश के बड़े बांधों में से एक बाणसागर बांध है। प्रदेश की 17 हजार मेगावाट की कुल उत्पादन क्षमता में से 10 हजार मेगावाट के प्लांट इन्हीं 2 संभागों में हैं। दरअसल प्रदेश का धान का कटोरा कहलाने वाले विंध्य क्षेत्र की 30 में से 20 से ज्यादा विधानसभा सीटें धान पर ही निर्भर हैं। धान के करीब तीन लाख हेक्टेयर खेतों में इस बार बरसात कम होना, सिंचाई के लिए पानी न मिलना और चंद घंटे बिजली मिलना सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। धान उत्पादन में 25 से 50% तक का संभावित नुकसान का आकलन है। किसानों में इतना आक्रोश है कि इन क्षेत्रों के दावेदार गांवों में जनसमर्थन मांगने भी नहीं आ रहे।

दिल्ली मेट्रो को बिजली दे रहे पर यहां के किसानों को नहीं 
रीवा जिले में दुनिया के सबसे बड़े सोलर पावर प्लांट में से एक में उत्पादन चालू हो जाना शिवराज सरकार की बड़ी उपलब्धियों में से है। यहां से दिल्ली मेट्रो को सप्लाई हो रही है। बाणसागर और टोंस जल विद्युत उत्पादन के साथ-साथ सीधी -सिंगरौली-शहडोल में 10 हजार मेगावाट के पावर प्लांट चालू हो चुके हैं। लेकिन दीया तले अंधेरा वाली कहावत की तर्ज पर सिंचाई के लिए दिन में 4-6 घंटे भी बिजली नहीं मिल रही।

रीवा-सतना की 15 सीटों पर सबसे ज्यादा खराब हालात

रीवा-सतना जिलों की 15 सीटों पर हालत खराब है। रीवा की 7 सीटों पर पानी की कमी व 4-6 घंटे मिल रही बिजली से हालात दिन पर दिन बदतर होते जा रहे हैं। डीजल से सिंचाई करने में सक्षम किसानों या नहर नदी के किनारे के गांव को छोड़ दें तो त्योंथर, सिरमौर सिमरिया, मऊगंज, गुढ़ विधानसभा क्षेत्रों में हालात ज्यादा खराब हैं।

ये है स्थिति
3.3 लाख हेक्टेयर है रीवा संभाग में धान का रकबा।
2.3 लाख हेक्टेयर से ज्यादा धान सिंचित है,जो कि सबसे ज्यादा।
01 लाख हेक्टेयर से ज्यादा धान सिर्फ बारिश के पानी पर निर्भर।
25% से 50% तक नुकसान का अनुमान है उत्पादन में इस बार।

चौपाल से…डीजल पंप से सिंचाई सबके बस मा नहीं आय, बहुत महंगी पड़ जात 

राजकुमारी पटेल : खड़ी धान सूख गय। कई एक जने के एक दाना ना होई। हमार आधी सूख गय। जब जरूरत रही तब बिजली नहीं मिली।
हरि सिंह : बिजली खाली चार-पांच घंटा मिलत ही। पूर बिजली मिलती तो, 2 एकड़ मा 50 क्विंटल धान से कम ना होता। डीजल पंप से सिंचाई सबके बस मा नहीं आय,बहुत महंगी पड़ जात है।
रामनरेश : नवदुर्गा से थोड़ी बिजली मिलय लाग ही, नहीं तो पहिले बस 4-5 घंटा मिलत रही। ओहूमा कम ज्यादा वोल्टेज से मोटर जल जात ही।
प्रमोद पटेल : साहब, हम हजारों आवारा जानवरों से पहले ही परेशान थे। तुवर की खेती तो बंद ही कर दी। अब दिन-रात बिजली और जानवर पर निगाह गड़ाए रखनो पड़ रई। का करें, अब वोट दओ है भुगतें भी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here