चुनावी चौपाल: किसान हितैषी घोषणाएं नहीं, लागू करने वाली चाहिए सरकार

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खण्डवा Nov 12, 2018

विधानसभा चुनाव में किसानों के कर्ज माफी का प्रदेश में मुद्दा बनने के बाद खरगोन के किसान खाद-बीज के दाम घटाने और उपज का मूल्य निर्धारण की मांग कर रहे हैं। रविवार को अनाज मंडी में आए किसानों की दैनिक भास्कर ने चौपाल बनाकर चर्चा की।

उन्होंने कहा- अब तक की सभी सरकारों ने किसानों पर वो ध्यान नहीं दिया, जो उन्हें देना चाहिए था। किसान हितैषी घोषणाएं ही नहीं उन्हें सरकार लागू भी करवाएं। सरकार किसानों को आर्थिक व संसाधनों से मजबूत बनाएं की उन्हें बार-बार कर्ज माफी की आवश्यकता ही नहीं पड़े। टांडा बरूड़ के किसान महेंद्र कुमरावत ने कहा- डीएपी के रेट बढ़ा दिए हैं लेकिन किसानों को उचित मूल्य नहीं दिया। समर्थन मूल्य मंे उपज बेचने की लिमिट को समाप्त करना चाहिए, क्योंकि किसी खेत में कम तो किसी में अधिक उपज होती है। कसरावद ब्लॉक के िबठेर निवासी तिलोकचंद्र पाटीदार ने कहा- किसानों की आर्थिक स्थिति में अब तक कोई खास परिवर्तन नहीं आया है। इसके लिए सरकार को मजबूत योजना बनाकर अमल में लाना चाहिए।

कर्मचारियों का वेतन बढ़ता है किसानों की उपज के दाम नहीं

हनुमंत्या के किसान नानूराम दुधे ने कहा- बीते 10 सालों में सरकारी कर्मचारी का वेतन 500 से बढ़कर 35 हजार रुपए तक आ गया है लेकिन किसान आज भी वहीं पर है, जहां से वह 20 साल पूर्व निकला था। बरूड़ के किसान राजेश वर्मा ने कहा- सरकार को खेती को एक उद्योग की तरह लेना चाहिए, उपज का लागत मूल्य निकालकर मुनाफा तय करना होगा, तभी हम सभी किसानों की आर्थिक स्थिति में बदलाव आएगा। बरूड़ के ही किसान राजा कुमरावत ने कहा- खेती को फायदे का धंधा बनाया जाना बहुत आवश्यक है। राजनीतिक पार्टियां घोषणा करती है लेकिन सरकार बनते ही इसे भूल जाती है। खेती में कम लाभ होने के कारण आज का युवा दूसरे के यहां पर नौकरी करना पसंद कर रहा है लेकिन वह खेती नहीं करता है।

चर्चा कर उपज मूल्य निर्धारण की मांग की।

सहकारी बैंक से 2500 रुपए वसूलते हैं कर्ज की रािश

जिला सहकारी बैंक मंे खरगोन-बड़वानी दोनों जिलों के किसान शािमल हैं। 2 लाख िकसान खाता धारक हैं। किसानों को 25 हजार रुपए एकड़ तक ऋण मिलता है। एक साल में औसत 2500 करोड़ रुपए वसूलना होता है कर्ज की रािश। सहकारी बैंक में एक अप्रैल से 30 िसतंबर के बीच िदए गए ऋण की रािश खरीफ सीजन के तहत आती है। इसकी रािश 28 मार्च तक बैंक वसूल करती है। जबकि रबी सीजन एक अक्टूबर से 31 मार्च तक चलता है। इसकी रािश वसूलने की अंितम तारीख 15 जून होती है।

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