मटर के बाद अब फूलों की खेती से तरक्की की राह पर गांव

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बड़नगर (उज्जैन) Nov 01, 2018

नए जमाने की खेती-बाड़ी के ढर्रे और सोच बदल चुके हैं। कुछ युवा रोजगार के लिए जगह-जगह भटक रहे हैं, लेकिन अमला गांव के युवा किसान फूलों की खेती से मालामाल हो रहे हैं। 50 से अधिक किसानों ने अपने खेतों में परंपरागत फसलों से तौबा कर फूलों की खेती करने की ओर रुझान बढ़ाया है। पहले एक-दो किसान फूलों की खेती करते थे, अब 50 से अधिक किसानों ने यह फसल अपनाई है। अब फूलों की खेती इनके लिए मुनाफे का सौदा साबित हो रही है। एक दशक पहले अमला गांव की अलग पहचान थी। यहां के मटर महाराष्ट्र, गुजरात और मध्यप्रदेश के प्रमुख शहरों की मंडियों में पहुंचते थे। अब पानी की कमी व मिट्टी में रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते प्रयोग से यहां की जमीन मटर फसल के लिए मुफीद नहीं रही। किसानों ने भी हार नहीं मानी और उन्होंने फूलों की खेती के तरफ अपना हाथ बढ़ाया। कुछ किसानों को सफलता मिलने के बाद फूलों की खेती करने वाले किसानों की संख्या बढ़ती गई। वर्तमान में किसान सर्दियों में गेंदा व गुलदावरी के फूल उगाकर मालामाल हो रहे हैं। किसान हुकुमचंद हारोड़ के मुताबिक एक बीघा में होने वाली फूलों की खेती में 50 हजार रुपए तक का मुनाफा मिल रहा है। फूलों की खेती में पानी और दवाइयां कम लगती है। ठंड में भी अधिकतर फूल जलते नहीं है। बारिश से भी फूलों की खेती प्रभावित नहीं होती। कम लागत में अधिक मुनाफा देती है।

इन किसानों ने की फूलों की खेती

वैसे तो फूलों की खेती करने वाले अमला के किसानों की फेहरिस्त लंबी है, लेकिन मुख्य रूप से फूलों की खेती की जा रही है, इसमें रमेश चौहान, शिवनारायण बोड़ाना, मुकेश डोडिया, गोपाल बारौड़, शंकरलाल दीया, देवेंद्र चौहान, मोतीलाल शर्मा, श्रवणसिंह राठौर आदि किसान फूल की खेती कर अधिक मुनाफा कमा रहे हैं।

अमला गांव के युवा किसान हुकुमचंद हारोड़ फूलों की खेती कर रहे हैं। 90090-04605

ऑनलाइन पंजीयन न होने से नहीं मिल रहा शासन से अनुदान

उद्यानिकी विभाग के अधिकारी शकील खान का कहना है पहले किसानों को विभाग से फूलों की खेती करने पर अनुदान मिलता था। इसका किसान फायदा भी लेते थे। अब ऑनलाइन हो जाने से किसानों को पंजीयन कराना जरूरी हो गया है। अनुदान राशि भी सरकार किसानों के खाते में सीधे डालती है। अमला गांव के गुलदावरी व गेंदा के फूल गुजरात के अहमदाबाद, सूरत, बड़ौदरा और मप्र के उज्जैन, इंदौर, भोपाल शहर की मंडियों मे महकते हैं। किसान एक दिन छोड़कर दूसरे दिन इन फूलों की तुड़ाई करता है। फिर चार पहिए वाहन में भरकर मंडियों में ले जाते हैं, जहां उन्हें अच्छी रकम मिलती है।

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