दो माह देरी से शुरू हुई कपास की खरीदी, इस बार 15 हजार क्विंटल की हुई आवक

0
125

खरगौन Nov 07, 2019

कपास के अच्छे दाम व अधिक आवक देने वाली सनावद मंडी में इस बार कपास की आवक कम हो रही है। हर साल सितंबर में मंडी में कपास की बिक्री शुरू हो जाती थी लेकिन इस साल नवंबर में कपास की आवक शुरू हुई है। इससे मंडी में किसानों को कपास के दाम अच्छे नहीं मिल पा रहे हैं। किसानों की मानें तो इस बार लंबे समय तक बारिश जारी होने के कारण कपास की क्वालिटी खराब हो गई है। साथ ही कपास की फसल को नुकसान होने से उत्पादन भी कम हुआ है। इसके लिए किसान मंडी में कपास नहीं ला पा रहे हैं। अब तक सनावद मंडी में 50 हजार क्विंटल से अधिक कपास की आवक हो जाती थी लेकिन इस बार मात्र 15 हजार क्विंटल कपास ही मंडी में पहुंच पाया है। पिछले साल कपास की आवक 1 लाख 23 हजार 929 क्विंटल हुई थी।

मंडी प्रबंधन के सौभाग सिंह पटेल ने बताया सितंबर माह से कपास की आवक मंडी में शुरू हो जाती है लेकिन इस बार दो माह बीतने के बाद कपास की आवक शुरू हुई है। मंडी में कपास की आवक भी कम हो रही है। जिससे व्यापारियों को रुझान भी कम ही दिखाई दे रहा है। किसानों को खराब क्वालिटी के कारण दाम भी उचित नहीं मिल पा रहे हैं। हर साल इस समय तक मंडी में करीब 50 हजार क्विंटल तक कपास की आवक हो जाती थी लेकिन अब तक मात्र 15 हजार क्विंटल ही कपास पहुंचा है जो किसानों के लिए अच्छे संकेत नहीं है।

अब तक सनावद मंडी में 50 हजार क्विंटल से अधिक कपास की हो जाती थी आवक लेकिन इस बार हुई कम

मंडी में बिकने के लिए आया कपास।

किसान बोले- 300 क्विंटल से 30 पर आ गया उत्पादन

किसान रविंद्र ने बताया हर साल कपास की फसल लगाने पर करीब 300 क्विंटल के आसपास उत्पादन होता था। इस बार अधिक बारिश व लंबे समय तक बारिश से फसल खराब हो गई। कपास का उत्पादन मात्र 30 क्विंटल पर आ गया। ऐसे में फसल की लागत नहीं निकल पाएगी। किसान नरेंद्र बिरला ने बताया अधिक बारिश के कारण कई किसानों की फसल खेत में लगे लगे ही खराब हो गई। कुछ किसानों के खेतों में कपास निकला तो वह काला पड़ गया। जिसके कारण उसकी क्वालिटी खराब हो गई है। व्यापारी किसानों को कपास के दाम भी नहीं दे रहे हैं। जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

मंडी को राजस्व का होगा नुकसान, पिछली बार जीता था पुरस्कार

सनावद मंडी में कपास व अन्य फसलों के दाम अच्छे मिलने के कारण आसपास के क्षेत्र से बड़ी संख्या में किसान अपना उपज लेकर पहुंचते थे। इससे मंडी को राजस्व अच्छा मिलता था। जिसके कारण पिछली बार प्रदेश में सबसे अधिक राजस्व एकत्र करने पर पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया गया था लेकिन इस बार फसल खराब व नुकसान अधिक होने से किसान मंडी में कम संख्या में पहुंच रहे हैं। जिससे मंडी को राजस्व का नुकसान हो रहा है। इस बार मंडी के राजस्व में कमी भी आने का आसार बना हुआ है।

पांच साल में कपास के भाव व आवक

वर्ष आवक भाव

2014-15 101594 1300-5100

2015-16 72270 2900-4850

2016-17 29465 2100-6200

2017-18 42051 3075-5460

2018-19 123929 3940-5850

(नोट- आवक और भाव के आंकड़े क्विंटल में है।)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here