कोटा बैराज से छोड़ा 900 क्यूसेक पानी, 3 दिन में पहुंचेगा श्योपुर, किसानों को 15 दिन बाद मिलेगा

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श्योपुर | Oct 12, 2018

सरसों व चने की बोवनी का समय शुरू हो चुका है। इसकी बोवनी के साथ ही मौसम ने मुसीबत बढ़ा दी है। क्योंकि वर्तमान में तापमान 37 डिग्री तक चल रहा है। कृषि विभाग के उप संचालक पी गुजरे के मुताबिक सरसों व चना की बोवनी के लिए 20 अक्टूबर तक का ही समय है, लेकिन तापमान की बढ़ोतरी से किसानों को नुकसान होगा। सरसों व चने की बोवनी के लिए तापमान 32 डिग्री से कम होना चाहिए। बढ़ते तापमान के चलते पौधे का अंकुरण नहीं होगा या पाैधे की बढ़त नहीं होगी।

15 दिन के अंतराल से सिर्फ दो बार ही मिलेगा पानी

चंबल नहर में रबी सीजन में लगातार पानी चलेगा, लेकिन श्योपुर की 27 माइनर शाखाओं में यह पानी दो बार दिया जाएगा, वह भी 15-15 दिनों के अंतराल में। ऐसा इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि कोटा बैराज डैम को गांधी सागर बांध से पानी नहीं मिलेगा। इसकी वजह गांधी सागर डैम में पानी न होना है। गांधी सागर डैम में बारिश के दौरान सिर्फ 25 फीसदी ही पानी रहा है जिससे किसानों को इस साल भी पिछले साल की तरह दो ही बार पानी दिया जाएगा। ऐसे में गेहूं की फसल करने वाले किसानों के सामने पलेवा के बाद तीन पानी देने का संकट खड़ा हो जाएगा। बता दें कि नहर की माइनर शाखाओं में पानी छोड़ने के साथ ही चार बार पानी दिया जाता है, लेकिन पिछले साल नहर से सिर्फ दो पानी दिए गए थे।

इधर, धान के लिए दी जा रही बिजली, शहर में समस्या

वर्तमान में 32 हजार हेक्टेयर में लगी धान की फसल की कटाई 15 दिन बाद शुरू होगी। फसल में अंतिम पानी दिया जा रहा है। श्योपुर के 132 केवी सब स्टेशन से ग्रामीण क्षेत्रों में पॉवर सप्लाई की जा रही है, ताकि किसान धान की फसल की सिंचाई कर सके। इससे शहर की बिजली सप्लाई पर विपरीत असर पड़ रहा है। शहर में कम वोल्टेज की समस्या उत्पन्न हो गई है। इस कारण बिजली संबंधित कामकाज ठप हो गए हैं। बिजली कंपनी के जीएम आरपी बिसारिया के मुताबिक चार दिनों तक यह समस्या बनी रहेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई के लिए बिजली सप्लाई बंद होने के साथ ही शहर की समस्या हल हो पाएगी।

पहले भिंड तक पहुंचाया जाएगा पानी ताकि बाद में समस्या न हो

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