सालों से खेतों में निकल रही प्राचीन मूर्तियां व शिलालेख, पुरातत्व विभाग ने कराई खुदाई

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 निवाली Oct 22, 2018

नगर से 5 किमी दूर ग्राम वझर व फुलज्वारी में लोगों के खेतों में जुताई के दौरान सालों से प्राचीन मूर्तियां व शिलालेख निकल रहे हैं। ग्रामीणों ने खेतों में निकली कुछ मूर्तियों को संग्रहित कर मंदिर के पास एकत्र किया है। वहीं कुछ मूर्तियां लोगों की खेतों की मेंढ़ों पर पड़ी हैं। इन मूर्तियों का संरक्षण नहीं होने से इन में टूट-फूट भी हो रही है। उल्लेखनीय है पहली बार 15 दिन पहले पुरातत्व विभाग की टीम गांव पहुंची थी। उन्होंने लोगों से चर्चा कर इन मूर्तियों की जानकारी ली। साथ ही वझर मंदिर के आसपास खुदाई भी कराई। इसमें कुछ मूर्तियां निकली हैं। हालांकि अभी खुदाई का काम बंद कर दिया गया है।

साथ ही मूर्तियां भी जस की जस गांव में ही पड़ी हैं। पुरातत्व विभाग ने इन्हें अभी यहां से हटवाया नहीं है। ग्रामीणों ने बताया वझर के आसपास के एक दो गांवों में खेतों में खुदाई के दौरान दो से तीन फीट गहराई में ही मूर्तियां आसानी से निकल आती हैं। इनमें से ज्यादातर मूर्तियां खंडित हैं और इसमें शिवलिंग, गणेश सहित अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां निकलती हैं। ग्रामीणों ने गांव में ही संग्रहालय बनाकर इन मूर्तियों को संग्रहित करने की मांग की है। ताकि गांव पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सके।

लोग बोले गांव में ही बने संग्रहालय, हो रखरखाव

खेत की मेढ़ पर रखी मूर्तियां देखते ग्रामीणजन।

वझर के हनुमान मंदिर की मूर्ति भी यहां निकलती थी

गांव के रामसिंह सोलंकी ने बताया वझर के हनुमान मंदिर में रखी चार फीट ऊंची मूर्ति भी स्वत: ही खेत से निकली थी। इसके बाद इसे स्थापित किया गया था। इनकी स्थापना नहीं की गई है। ना ही प्राण प्रतिष्ठा हुई है। इसके अलावा यहां गणेश, शिवलिंग, ब्रह्मं सहित अन्य देवी देवताओं की प्राचीन मूर्तियां व शिलालेख निकलते हैं। गांव के 85 साल के बंसीलाल जायसवाल ने बताया क्षेत्र में बहुत बड़ी मात्रा में प्राचीन मूर्तियां पहले से ही स्थापित हैं। अनोखी लाल वर्मा, रतनसिंह पटेल ने बताया गांव प्राचीन मूर्तियों का बहुत बड़ा स्रोत है। यहां सेंधवा किले से संबंधित मूर्तियां भी निकली हैं।

फूल से बनी मूर्ति निकली, गांव का नाम फुलजौहरी पड़ा

वझर से तीन किमी दूर व निवाली से 8 किमी दूर ग्राम फुलवारी में अति प्राचीन पातालेश्वर शिव जी का मंदिर है। जहां पर जमीन में पत्थर की मूर्तियां व फूल की आकृति से लगे पत्थरों के कारण गांव का नाम फुलज्वारी रखा गया। सरपंच व गांव के मदन खरते ने बताया। यहां पर बने इस पातालेश्वर शिवलिंग में आसपास विभिन्न मूर्तियां बनी हैं। साथ ही यहां फूल से बनी आकृतियों की शिला अधिक थी। जहां खेती के दौरान जगह-जगह यह पत्थर निकलते थे। इस कारण इस गांव का नाम फुलज्वारी रखा गया है।

फुलज्वारी में है ब्रह्मा मंदिर

दुर्गेश जायसवाल ने बताया फुलज्वारी गांव में ब्रह्मा मंदिर है। इसमें ब्रह्माजी की मूर्ति स्थापित है। यह मूर्ति भी गांव में ही खेत से निकली थी। इसके बाद लोगों ने इसे मंदिर में स्थापित कर दिया। इसे देखने दूर-दूर से लोग भी आते हैं। लोगों ने यहां संग्रहालय बनाने की मांग की है। ताकि पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सके। इससे ग्रामीणों की आय भी बढ़ेगी।

पातालेश्वर शिवलिंग के आसपास रहता है पानी

सरपंच कुंता इकराम खरते ने बताया परिवार के लोग बरसों से यहां रह रहे हैं। लगातार इस पातालेश्वर शिवलिंग में पूजा-अर्चना करते हैं। यहां 12 महीने शिवलिंग पानी में डूबा रहता है। साथ ही पानी का स्तर भी गर्मी व बारिश के बावजूद कम ज्यादा नहीं होता।

पंचायत में बनाएंगे प्रस्ताव, संग्रहालय की मांग करेंगे 

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