24 घंटे पहले ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर पहुंच रहे किसान, तब हो पा रही धान की नीलामी

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रायसेन Nov 12, 2018

जिले में इस बार धान की अच्छी पैदावार होने से नीलामी के लिए बड़ी मात्रा में धान लाई जा रही है। भीड़ अधिक होने से नीलामी में भी किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके चलते किसान 24 घंटे पहले ही रायसेन के दशहरा मैदान में पहुंच रहे हैं। वे एक दिन और पूरी रात खुले आसमान के नीचे गुजार रहे हैं। तब कहीं जाकर उनकी धान की नीलामी हो पा रही है। शनिवार और रविवार को अवकाश था। इसके बावजूद रविवार को सुबह से ही दशहरा मैदान परिसर में दर्जनों धान की ट्रॉलियां लाकर किसानों ने खड़ी की हुई थी।

उमरई गांव से धान लेकर आए किसान शगीर बताते हैं कि मंडी में बड़ी मात्रा में धान की आवक हो रही है। इससे एक दिन में भी धान की नीलामी नहीं हो पाती है। इसके चलते वे रविवार को सुबह 10 बजे शहर के दशहरा मैदान में पहुंच गए। 24 घंटे के इंतजार के बाद सोमवार को ग्यारह बजे के करीब उनकी धान की नीलामी का नंबर आ पाएगा। शगीर की तरह दर्जनों किसान रविवार को सुबह ही दशहरा मैदान में ट्रॉलियां लाइन से खड़ी करके बैठे हुए थे। और रात भी उन्होंने खुले आसमान के नीचे ही बिताई।

ट्रॉलियां छोड़कर नहीं जा सकते: किसानों से जब पूछा गया कि मंडी में किसान विश्राम गृह की सुविधा का लाभ मिल पाता है या नहीं, तो उनका कहना है कि यदि मंडी परिसर में धान की ट्रॉलियां खड़ी करवाई जाती तो किसान विश्राम गृह में रुक सकते थे। मंडी परिसर में कवर्ड कैंपस है। वहां गेट लगे हुए सुरक्षा गार्ड तैनात रहते हैं। लेकिन दशहरा मैदान में ऐसी कोई सुविधा नहीं है। इसके चलते धान से भरी हुई ट्रॉलियां यहां छोड़कर कहीं नहीं जा सकते। धान की नीलामी होने तक हर किसान को यहां मौजूद रहना पड़ता है। यदि ऐसा नहीं करते तो धान चोरी होने की संभावना रहती है। इतना ही नहीं खाना भी वे दशहरा मैदान में ही बनाते हैं।

इसलिए होती है अधिक आवक: शहर की कृषि उपज मंडी प्रदेश की प्रमुख धान की मंडियों में गिनी जाती है। इतना ही नहीं भोपाल सहित आसपास के जिले में धान के खरीददार ही उपलब्ध नहीं है। इन सबके चलते रायसेन शहर की कृषि मंडी में भोपाल सहित कई जिलों के किसान धान लेकर आते हैं। इसके चलते जिले के अलावा आसपास से भी किसान धान लेकर आते हैं।

कई जिले से आती है धान 

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