उड़द बेचने 8806 और मूंग के लिए 913 किसानों ने कराया है पंजीयन

0
107

रायसेन Oct 31, 2018

जिले में सरकारी खरीदी के सबसे बुरे हाल हैं। हालत यह है कि तय तारीख के दसवें दिन तक खरीदी केंद्र ही नहीं खोले गए। ग्यारहवें दिन मंगलवार को मंडल प्रबंधक के दौरे को लेकर आनन-फानन में कृषि उपज मंडियों में एक बैनर लटकाकर और समिति प्रबंधकों को बैठाकर केंद्र खुलवा दिए गए।

इससे भ्रमण पर आए डीजीएम को इस बात का एहसास करा दिया गया कि खरीदी केंद्र चालू करवा दिए गए है, जबकि सोमवार तक वहां कोई केंद्र नहीं था। बाहर से आए किसान कृषि उपज मंडी से मूंग और उड़द की खरीदी की जानकारी लेकर वापस लौटते रहे हैं। हालांंकि केंद्र खुल जाने की जानकारी किसानों को नहीं होने से एक भी किसान इन केंद्रों पर उपज बेचने के लिए नहीं पहुंचा। लेकिन डीएमओ प्रदीप गिरेवाल ने मंडल प्रबंधक बृजेश द्ववेदी को जिले की कई मंडियों में भ्रमण कराकर उन्हें खरीदी केंद्र जरूर दिखा दिए। मंडल प्रबंध भी इन केंद्रों और वहां मौजूद सुविधाओं को देखकर चले गए। हालांकि उन्होंने कुछ जगह सुधार के लिए निर्देश दिए हैं। उन्होंने बेगमगंज मंडी में खरीदी गई उपज रखने के लिए टीन शेड खाली कराने के लिए कहा है। वहां व्यापारियों द्वारा रखा गया माल हटवाने के लिए कहा है। खरीदी केंद्र खोलकर सरकारी रेट पर मूंग,उड़द, मूंगफली और रामतिल की खरीदी की जाना है।

ग्यारहवें दिन भेजे साढ़े 1500 एसएमएस: किसानों को कब किस केंद्र पर अपनी उपज तुलवाने के लिए आना है। इसकी जानकारी देने के लिए तय तारीख 20 अक्टूबर की जगह ग्यारहवें दिन 30 अक्टूबर को जिले के किसानों को पहली बार भोपाल से ही एसएमएस किया गया है।

पहले किसानों को एसएमएस ही नहीं भेजे गए, क्योंकि जिले की किसी भी कृषि उपज मंडी और उपमंडियों में मार्कफेड द्वारा केंद्र नहीं खुलवाए नहीं गए थे।

घाटे में हैं किसान: किसान जिले की मंडियों और उपमंडियों में मूंग,उड़द और मूंगफली सरकारी रेट से भी अाधे दामों में बेचते आ रहे हैं। इसके चलते उन्हें जिस मूंग के रेट 6 हजार 978 रुपए प्रति क्विंटल मिलने चाहिए थे, वह मूंग उन्हें बमुश्किल तीन हजार रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से बेचना पड़ी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here