मंडी बोर्ड संचालक से बोला किसान- कुछ ही व्यापारी नीलामी में भाग लेते हैं जिससे दाम सही नहीं मिल रहे

0
104

राजगढ़ धार Oct 30, 2018

कृषि उपज मंडी बोर्ड के संयुक्त संचालक चंद्रशेखर वशिष्ठ ने सोमवार दोपहर 12 बजे मंडी का निरीक्षण किया। मंडी की जमीन एक स्थान पर उबड़ खाबड़ एवं खराब दिखने पर वहां शेड बनाने के निर्देश सचिव को दिए। किसानों एवं व्यापारियों की समस्याओं को भी सुना। नीलामी के दौरान भावों की जानकारी ली। किसानों ने पूछा की वे जो भाव मिल रहे उससे संतुष्ट हैं या नहीं। जिस पर किसानों ने कुछ ही व्यापारियों के नीलामी में भाग लेने पर भाव कम मिलना बताया। व्यापारियों ने कपास की खरीदी बिक्री शुरू करने की मांग उठाई।

वशिष्ठ के साथ सहायक संचालक मंडी बोर्ड दिलीप नागर भी थे। गेट पर आते ही अधिकारियों ने भावांतर योजना के अंतर्गत कर्मचारियों द्वारा किसानों से जानकारी लेकर दी जा रही प्रवेश पर्ची के कार्य पर प्रसन्नता जाहिर की। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी विजय सोलंकी एवं शंकरसिंह परमार के कार्य की प्रशंसा की। इसके बाद संयुक्त संचालक मंडी प्रांगण में पहुंचे। जहां गेहूं की नीलामी का कार्य एक तरफ चल रहा था। व्यापारियों द्वारा खरीदी जा रही उपज की प्रक्रिया देखी। गेहूं की नीलामी के दौरान किसान बाबूलाल कोदाजी ग्राम बोला के गेहूं की बोली 1965 रु. लगी तो किसान से पूछा की भाव ठीक है, तो बाबुलाल ने बताया भाव कम है।

यहां किसानों को भाव कम ही मिल रहे है क्योंकि कुछ ही व्यापारी नीलामी में भाग लेते हैं। सचिव को गेहूं एवं चने की उपज की नीलामी अलग-अलग ढेरियां बनवाकर करने को कहा साथ ही प्रतिदिन औसत अच्छी किस्म की उपज की जानकारी लिखने एवं भाव की जानकारी प्रदर्शित करने को कहा। काॅटन प्रोजेक्ट के लिए पर्याप्त जमीन एवं अनेक निर्माण कार्य होने के बावजूद अब तक काॅटन की खरीदी नहीं होने पर व्यापारी संजय मेहता ने बताया कालीदेवी एवं झाबुआ क्षेत्र में भारी मात्रा में कपास उत्पादन होता है। झाबुआ में कपास मंडी नहीं लगती है। यदि यहां कपास मंडी शुरू होती है तो उसका लाभ मंडी एवं व्यापारियों को मिलेगा।

राजगढ़. मंडी परिसर में नीलामी के दौरान किसानों की समस्या को जानते वशिष्ठ।

कर्मचारियों से उनके कार्य की जानकारी ली

मंडी सचिव हरेंद्रसिंह सिकरवार से कार्यरत कर्मचारी की जानकारी ली। कार्यालय गेट पर सभी कर्मचारियों के नाम व संख्या लिखी होने पर संतोष जताया। प्रत्येक कक्ष में जाकर कर्मचारियों से उनके नाम, पद एवं कार्य की जानकारी ली। सचिव से मंडी की सालाना कमाई की भी जानकारी ली। व्यापारी संजय मेहता ने वशिष्ठ को बताया उनकी एक अनुज्ञा में कर्मचारी द्वारा गलत उपज लिख देने से सुधार नहीं हो रहा। कर्मचारी एस सोलंकी को बुलाकर जवाब तलब किया। तत्काल इंदौर आंचलिक कार्यालय व भोपाल बात कर समस्या का निराकरण किया। केश बुक अद्यतन नहीं होने पर नाराजगी जाहिर की। सचिव को निर्देश दिए की सभी किसानों को पेमेंट आरटीजीएस से किया जाए। कुल पेमेंट में से 10 हजार या उपज का आधा भुगतान नकद किया जा सकता हैं। 4 कर्मचारियों को पिछले 4 माह से वेतन नहीं मिलने पर मंडी से ही वेतन का भुगतान करने के निर्देश दिए। आॅपरेटरों ने वशिष्ठ को आवेदन दिया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here