माहू का प्रकोप: जड़ों व तनों से रस चूसने से गेहूं की फसल पीली पड़ी, चना को चट कर रहीं इल्लियां

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सांंरगपुर Dec 12, 2019

खरीफ फसलें इस बार अतिवृष्टि से प्रभावित रहीं। जिसका आर्थिक असर किसानों से लेकर बाजारों में अभी भी देखा जा रहा है। अब किसान रबी फसलों पर आश्रित है। लेकिन यह फसल भी शुरूआती दौर में ही प्रभावित होती नजर आ रही है। वर्तमान समय में रबी फसलें जैसे गेहूं, चना, मसूर आदि फसलों में कटुआ इल्ली (हेलीकोवर्षा आर्निझेरा) का प्रकोप मुख्य रूप से दिख रहा है।

यह इल्ली सर्वप्रथम पत्तियों का हरा पदार्थ खुरचकर खाती है। फिर इसके बाद पत्तियों, टहनियों को खाती है। अत्यधिक प्रकोप होने की अवस्था में फसलों को जमीन के ऊपर के भाग को खाकर अत्यधिक नुकसान पहुंचा रही है। इसको लेकर कृषि अधिकारी किसानों को फसल को इल्ली से बचाने की सलाह भी दे रहे हैं। ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी ओपी शर्मा ने बताया कि इल्ली के शरीर का ऊपरी पृष्ठ चमकीला, हरा, भूरा अथवा काले रंग का होता है व नीचे का भाग भूरा सा चमकदार होता है। यह इल्ली रात के समय ही फसलों पर आक्रमण करती है। दिन के समय मिट्टी के ढेलों के नीचे या दरारों में छुप जाती है।

श्री शर्मा ने बताया कि इस कीट का प्रकोप चना में फसल की प्रारंभिक अवस्था से लेकर फसल पकने तक रहता है। इसके व्यस्क मादा अपने संपूर्ण जीवन काल में 1200-1500 अंडा पत्तियों की निचली सतह पर देती है। अंडे समूह में न होकर एक-एक की संख्या में अलग अलग रहते हैं।

गेहूं फसल भी हो रही बीमारी, बताए बचाव के तरीके : वर्तमान समय में गेहूं की फसल में पीलापन आ रहा है। जिससे किसान के मन में दुविधा बनी हुई ह कि ये कौनसी बिमारी है। इसको लेकर वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री सिंह ने कहा कि गेहूं के सूखने या पीलापन का मुख्य कारण जड़ माहू कीट का प्रकोप है। जिसके रस चूसने से गेहूं की वृद्धि रुक जाती है और वह पीला पड़कर सूख जाता है। श्री सिंह ने बताया कि जड़ माहू द्वारा प्रकोपित फसल को उखाड़कर सफेद पेपर पर रखकर देखने पर भूरे भूरे रंग के बारिश माहू दिखाई देते हैं, जो कि पौधों की जड़ों एवं तनों से रस चूसते रहते हैं। जिससे नुकसान होता है। इससे बचाव के लिए एके सिंह कृषि अधिकारी ने बताया कि इस प्रकोप से गेहूं की फसल बचाने क्लोरोपायरीफॉस 20 ईसी दवाई 2 लीटर प्रति एकड़ 40 किलोग्राम बालुरेज में मिलाकर जमीन में नमी होने पर भुरकाव करें। जबकि माहू का प्रकोप तनों पर होने पर इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल, 100 एमएल दवाई प्रति एकड़ की दर से हाथ पंप द्वारा 200-250 लीटर, जबकि पॉवर स्पेयर से 60 से 70 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।

अफसरों ने दी गेहूं एवं चना की फसलों को कीट अौर रोगों से बचाने की सलाह

कीटों के प्रकोप से पीली पड़ने लगी गेहूं की फसल।

कैसे करें चने की इल्लियों पर नियंत्रण

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