रस चूसक, इल्ली का प्रकोप कम करने जैविक खाद डालें तो 3 साल तक दवाई का खर्च बचेगा

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सीहोर | Oct 08, 2018

फसलों में रस चूसक कीड़े और इल्ली के प्रकोप सबसे अधिक होता है। इसको कम करने के लिए खेत में जैविक खाद डालकर माइक्रो पोषक तत्वों की कमी को दूर किया जा सकता है।

इससे फसलों के उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी। साथ ही अगले तीन साल तक उस खेत की फसल में रोग के प्रकोप का असर भी कम होगा और दवाई का अतिरिक्त खर्च भी बचेगा। सामान्यतः: किसान प्रति हेक्टेयर करीब 10 हजार रुपए की दवाई का छिड़काव हर फसल में रोगों को खत्म करने के लिए करते हैं।

फसल के अच्छे उत्पादन के लिए जिले में करीब 52 हजार किसानों ने वर्ष 2018-19 में स्वाइल हेल्थ कार्ड बनवाकर मिट्टी परीक्षण कराया है। इन्हें पोषक तत्वों की कमी को दूर करने जैविक खाद गोबर, कंपोस्ट और केंचुआ खाद मिलाने की सलाह दी जा रही है। इसके अलावा रासायनिक उर्वरक आवश्यकतानुसार फसलों में बोवनी के दौरान मिलाने की सलाह दी गई है।

प्रति हेक्टेयर 6 से 10 टन डाले जैविक खाद, खर्च बचेगा : सहायक मिट्टी परीक्षण अधिकारी एसएन सोनानिया ने बताया कि फसलों के उत्पादन के लिए मिट्टी में पाए जाने वाले आवश्यक माइक्रो पोषक तत्वों की कमी को दूर करने के लिए किसान जैविक खाद डालकर इसकी पूर्ति कर सकते हैं। जैविक खाद गोबर, कंपोस्ट और केंचुआ खाद करीब 6 से 10 टन तक प्रति हेक्टेयर डालने से मिट्टी में आवश्यक पोषक तत्व की कमी दूर हो जाती है। इसके बाद किसान तीन साल तक खेतों में बोवनी के दौरान किए जाने वाले उर्वरक पर खर्च को कम कर सकते हैं। इससे किसानों की आय भी बढ़ेगी। साथ ही उत्पादन भी अच्छा होगा।

परीक्षण में पोषक तत्वों की पर्याप्त उपलब्धता

जिले के खेतों के मिट्टी परीक्षण की औसतन रिपोर्ट में 80.9 प्रतिशत जिंक, 75.3 प्रतिशत सल्फर, बोरान 90.4 प्रतिशत, कॉपर 95.6 प्रतिशत, मैग्नीज 96.8 प्रतिशत और फासफोरस 76.6 प्रतिशत है जो कि रबी सीजन की फसलों के लिए उत्तम है।

दलहनी फसलों में इस तरह से करें उर्वरक का उपयोग

प्रति हेक्टेयर यूरिया 43 किग्रा, सुपर फास्फेट 375 किग्रा, पोटाश 36 किग्रा, सल्फर 25 किग्रा, जिंक 25 किग्रा, बोरान 8 किग्रा, आयरन 25 किग्रा, मैग्नीज 20 किग्रा, कॉपर 10 किग्रा मिलाकर बोवनी कर सकते हैं।

अनाज की फसलों में इस तरह करें उर्वरक का उपयोग

प्रति हेक्टेयर के हिसाब से अनाज फसलों में यूरिया 260 किग्रा, पोटाश 66 किग्रा का उपयोग कर सकते हैं। इसके साथ ही दलहनी फसलों तरह अन्य सल्फर, जिंक, बोरान, आयरन सहित अन्य पोषक तत्व की मात्रा खेत में डाल सकते हैं।

पोषक तत्वों की जानकारी के लिए ब्लाक कार्यालय में लगेंगे बोर्ड : किसानों के खेतों की मिट्टी में कोन-कोन से पोषक तत्व जरुरी है और क्षेत्र में किस पोषक तत्व की कमी है। इसकी जागरूकता लाने किसानों के लिए हर ब्लाक के कृषि कार्यालय में एक बोर्ड लगाया जाएगा। इसमें हर ब्लाक की मिट्टी परीक्षण की रिपोर्ट और पोषक तत्वों का प्रतिशत रहेगा।

फसलों सेे कीड़ों को खत्म करने गोबर, कंपोस्ट और केंचुआ खाद रामबाण

प्रयोगशाला में काम बाकी

जिले में हर ब्लाक में एक मिट्टी परीक्षण प्रयोग शाला लगाने की स्वीकृति मिली थी। अभी तक नसरुल्लागंज ब्लाक में प्रयोग शाला में उपकरण आए हैं। आष्टा में प्रयोगशाला भवन बन रहा है जिसका काम अंतिम चरण में हैं। जबकि बुदनी, इछावर में अभी प्रक्रिया शुरु नहीं हो सकी है। वर्ष 2018-19 में 85 हजार किसानों के खेतों की मिट्टी का परीक्षण करने का लक्ष्य दिया गया है। अभी तक करीब 52 हजार किसानों के खेतों की मिट्टी का परीक्षण किया जा चुका है।

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