शाजापुर : किसान ने खेत पर कुआं खुदवाया, पर्याप्त पानी निकला तो मंदिर और स्कूल में पानी पहंुंचाया, पूरे गांव के लोगों की बुझा रहे प्यास

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शाजापुर Apr 29, 2019,

पाचारुंडी के किसान ने पहले मंदिर परिसर, फिर स्कूल और अब पूरे गांव में हरियाली फैला दी है। 7 लाख रुपए खर्च कर उन्होंने कुआं खुदवाया और 8200 फीट लंबी पाइप लाइन डालकर क्षेत्र में पानी ही पानी कर दिया। कुएं में पर्याप्त पानी होने से वे क्षेत्रवासियों को भी मुफ्त में ही पानी उपलब्ध कराते है।

जिला मुख्यालय से 10 किमी दूर सुसनेर मार्ग पर चामड़दा के पास देवनारायण मंदिर से सैकड़ों गांव के लोगों की आस्था जुड़ी है। छोटा-बड़ा काम शुरू करने से पहले ग्रामीण भगवान देवनारायण की ही मन्नत करते हैं। गोकुल सिंह यादव का खेत मंदिर से कुछ ही दूरी पर है। 2010 में जब उन्होंने कुआं खुदवाया था, तब भगवान देवनारायण से मन्नत की थी कि मंदिर व अन्य लोगों को निः शुल्क पानी अपनी तरफ से दूंगा। करीब 60 फीट गहरे कुएं में इतना पानी है कि गर्मी के दिनों में भी 10 हार्सपावर की मोटर करीब 5 घंटे चलती है। यादव का एक अन्य खेत देवनारायण मंदिर की दूसरी तरफ है। यादव ने 7 लाख रुपए खर्च कर कुआं बनवाया और 8200 फीट पाइप लाइन कुएं से दूसरे खेत तक डाली। बीच में आने वाले मंदिर की टंकी में एक कनेक्शन करके मंदिर में पानी देना शुरू किया। करीब 9 सालों से मंदिर में निःशुल्क पानी दे रहे यादव पहले मंदिर की टंकी भरते है। इसके अलावा मंदिर परिसर में कोई धार्मिक आयोजन या शादी हो, तो उन्हें भी पानी उपलब्ध कराया जाता है। मंदिर में आए दिन शादी व बड़े-बड़े आयोजन होते रहते हैं।

बच्चों की परेशानी देखी, तो स्कूल को भी देते है पानी – गोकुल सिंह यादव के पुत्र सुंदर यादव भी पिता की तरह कार्य करते है। सुंदर को पता चला कि देवनारायण मंदिर के पास एक निजी स्कूल के बच्चों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ता है, तो दोनों पिता-पुत्र ने अपने खर्च से 500 फीट लाइन डालकर स्कूल को भी पानी देना शुरू कर दिया। पिता-पुत्र का कहना है कि स्कूल में आने वाले बच्चे ईश्वर का ही रूप है। वे कैसे प्यासे रह सकते हैं।

देवनारायण मंदिर के पास बनी टंकी में रोज भरते है पानी।

गोकुल सिंह यादव।

पुत्र सुंदर यादव

गांव के साथ यात्रियों की सुविधा का भी रखा ध्यान

चामड़दा में सुसनेर मार्ग के दोनों ओर करीब 25 घरों की बस्ती है। इसके अलावा यह करीब 10 गांवों के लोगों के आने-जाने का स्टेशन है। अहिरबर्डिया, पाचारूंडी, काशीबर्डिया, बापचा, कराड़िया, मंगवालिया आदि गांव के लोग चामड़दा से ही आना-जाना करते हैं। पानी की कमी होने के कारण ग्रामीणों के साथ-साथ यात्रियों को भी पानी के लिए परेशान होना पड़ता था। छोटे बच्चों को साथ लेकर यात्रा करने वाली महिलाओं को ज्यादा दिक्कत होती थी। गोकुल सिंह व सुंदर ने करीब 1 इंच की 1 हजार फीट लंबी पाइप लाइन डालकर चामड़दा को भी पानी देना शुरू कर दिया। काशीबर्डिया के हिंदूसिंह यादव बताते है कि गोकुल सिंह यादव के खेत के पास यदि कोई किसान फसल बो देता है अाैर पानी पिलाने में उसे दिक्कत होती हैं, तो पिता-पुत्र आसपास के किसानों को भी बिना कुछ लिए पानी दे देते हैै। गोकुल सिंह का कहना है हमारे आसपास के कुओं व ट्यूबवेल में पानी नहीं है और हमारे यहां पर्याप्त है, तो हम उसका इसी प्रकार सदुपयोग करना चाहते हैं।

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