जिले के तीन मध्यम व 43 छोटे बड़े बांधों से होगी इस बार 25 हजार हेक्टेयर से अधिक में सिंचाई

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आगर मालवा Nov 22, 2019

टिल्लर व कछाल बांध सहित आगर में तीन मध्यम, 30 छोटे व 13 स्टापडेम है। इनसे इस बार 25 हजार 669 हेक्टेयर जमीन को पानी दिया जाएगा। क्षेत्र के कई किसानों ने गेहूं-चने की फसल बोनी शुरू कर दी है तो कई किसान फसल बोने की तैयारी में है। क्षेत्र के प्रमुख टिल्लर डेम की नहर से आज से पानी किसानों को देना शुरू किया जाएगा। किसानों को पानी देने का यह सिलसिला मार्च तक जारी रहेगा। क्षेत्र में औसत से दोगुनी बारिश होने के कारण सारे तालाब व स्टापडेम लबालब है। किसानों को जब इन बांधों से पर्याप्त पानी मिलेगा तो आवक भी बंपर होना स्वभाविक है।

कानड़ क्षेत्र में आने वाला टिल्लर डेम से आगर को पीने का फिल्टर पानी मिलता है। इससे सबसे अधिक 5 हजार 500 हेक्टेयर जमीन में सिंचाई होती है। बांध की दाई नहर से ढाई हजार तो बाई नहर से 3 हजार हेक्टेयर जमीन तक पानी पहुंचता है। बांध पर जो नहर बनाई गई है वह लगभग 90 किलोमीटर लंबी है। टिल्लर परियोजना के अधिकारी ने बताया कि आज से बाई नहर विभाग द्वारा शुरू की जा रही है। इसके बाद दाई नहर शुरू होगी। किसानों की आवश्यकता अनुसार पानी देता रहेगा, लेकिन एक बार जब पानी देना शुरू किया जाता है वह 15 से 21 दिन चलता है। छोटी व बड़ी नहरों के माध्यम से किसान सिंचाई करते हैं। मार्च तक लगभग 4 बार पानी किसान को मिलता हैं।

कछाल बांध से देना शुरू किया पानी : बड़ौद क्षेत्र में स्थित कछाल बांध से 3300 हेक्टेयर में सिंचाई होती है। इसकी छोटी व बड़ी नहरें 43 किलोमीटर से अधिक लंबी है। बांध से पानी देना अधिकारियों ने शुरू कर दिया है जबकि आगर से करीब 1 किलोमीटर दूर परसुखेड़ी बांध से आज पानी छोड़ा जाएगा। इस छोटे से डेम से 172 हेक्टेयर में सिंचाई होती है तो कुम्हार पिपलिया बंाध से 1200 हेक्टेयर में सिंचाई होती है। करीब 25 किलोमीटर लंबी नहर से आगर क्षेत्र के गांव के अलावा कानड़ क्षेत्र के किसान भी सिंचाई करते हैं।

इस नहर में छोड़ा जाएगा पानी। यह पानी फसलों के लिए रहेगा उपयोगी।

पिछले वर्ष हुई थी 22 हजार हेक्टेयर में सिंचाई :

अतिवर्षा के कारण अधिकांश किसानों की खरीफ फसल खराब हुई थी। खेतों में पानी जमा रहने से सोयाबीन व अन्य फसल खेत में ही सड़ गई थी लेकिन अतिवर्षा का दूसरा अच्छा पहलू यह सामने आ रहा है कि औसत से दोगुनी बारिश के कारण लबालब हुए बांध व तालाबों से पिछले वर्ष के मुकाबले 3 हजार हेक्टेयर अधिक जमीन में सिंचाई होगी। पिछले वर्ष 22 हजार 814 हेक्टेयर जमीन में बांध, तालाब व स्टापडेमों के माध्यम से सिंचाई हुई थी। इस बार 25 हजार 669 हेक्टेयर जमीन में सिंचाई का अनुमान अधिकारी लगा रहे हैं। जिले में गणेशपुरा, कीटखेड़ी के अलावा रणायरा केलवा, बीजानगरी, कछालियां, आंबा बड़ौद, जोगी बर्डियां, भ्याना भुड़की आदि छोटे तालाब हैं। जिले में इस प्रकार के 30 छोटे तालाब व 13 स्टापडेम है जिनसे किसान सिंचाई करते हैं। नहरों के अलावा कई किसान बांध से पानी लिफ्ट भी करते हैं। ऐसे किसानों की संख्या भी क्षेत्र में काफी है। नलखेड़ी के पास बने कुुंडालिया परियोजना से अभी सिंचाई शुरू नहीं हुई है।

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