धान की फसल काटने के बाद नरवाई में लगा रहे आग, प्रदूषण फैलने से लोग परेशान

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श्योपुर Nov 07, 2019

इलाके में धान की फसल कटाई कार्य में तेजी आने के साथ ही खेतों से उठ रहा धुआं गांव से शहर तक लोगों के लिए आफत बनने लगा है। गेहूं बोवनी से झटपट निपटने की जद्दोजहद में जुटे किसान धान की फसल काटते ही नरवाई नष्ट करने के लिए खेतों में आग लगा रहे हैं। किसानों द्वारा नासमझी में फसल अवशेष जलाने पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती को देखते हुए मंगलवार को कृषि विभाग ने क्षेत्रीय किसानों को जागरूक करने के लिए अफसरों को मैदानी भ्रमण के निर्देश दिए हैं। प्रशासन की कवायद ,सुप्रीम कोर्ट एवं जीएनटी के आदेश भी बेअसर है। बड़ौदा, भोगिका और चकबमूल्या के हार में मंगलवार को कई जगह धान के फसल अवशेष खेतों में जलाने से चारों तरफ धुआं फैल गया। कृषि वैज्ञानिकों की समझाइश के बावजूद किसान बाज नहीं आ रहे हैं।

जिले के धान उत्पादक क्षेत्र से आसमान में धुएं के साथ फसल अवशेष का जला हुआ कचरा हवा में कई किलोमीटर उड़कर शहर तक पहुंचने लगा है। फसल कटाई कार्य रफ्तार पकड़ने के साथ ही वातावरण में धुआं से लोगों का सांस लेना कठिन हो रहा है। खासकर दमा रोगियों के लिए नरवाई का धुआं दुश्मन बन रहा है। पर्यावरण बिगड़ने के साथ ही आसपास गांवों में आग फैलने से लोगों को जानमाल को नुकसान की आशंका बन रही है। किसानों का कहना है कि इस बार धान की फसल लेट पकने के कारण पहले ही गेहूं की बोवनी वक्त से पिछड़ गई है, ऐसे में बोवनी के लिए खेत तैयार करने के लिए धान के अवशेष आग में झोंकना उनकी मजबूरी है।

उधर कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसानों को नरवाई जलाने से रोकने के लिए समझाइश दे रहे हैं, इसके बाद भी अगर किसान आग लगाने से नहीं माने तो नियमानुसार राजस्व अफसरों से कानूनी कार्रवाई करवाई जाएगी।

चकबूल्या के हार में मंगलवार को धान काटकर खेत में लगाई आग।

फसल काटने पंजाब-हरियाणा से आई हार्वेस्टर मशीन

खरीफ सीजन में जिले में कृषि विभाग ने 25 हजार हेक्टेयर में धान की पैदावार का लक्ष्य रखा था। लेकिन जुलाई के बाद अगस्त में हुई जोरदार बारिश को देखते हुए क्षेत्रीय किसानों ने 35 हजार हेक्टेयर में धान रोपणी कर दी थी। यह फसल पकाव पर आने के साथ ही पिछले एक सप्ताह से कटाई का काम चल रहा है। लगभग 35 फीसदी रकबे में फसल कटाई का काम निपट चुका है। धान की फसल काटने के लिए पंजाब और हरियाणा से आए 50 से अधिक हार्वेस्टर कंबाइन मशीनें आई हैं। बड़ौदा, प्रेमसर, सोंठवा, दांतरदा, मानपुर, गिरधरपुर, चकबमूल्या, बगदिया और ढोढर के आसपास क्षेत्र में दिनरात हार्वेस्टर से धान की फसल की कटाई की जा रही है। बची नरवाई में किसान आग लगा रहे हैं।

अभी 25 हजार हेक्टेयर में पकी खड़ी है धान की फसल

जिले में इस बार रिकॉर्ड 35 हजार हेक्टेयर में धान की पैदावार की है। इलाके में धान की फसल पकने के साथ ही धीरे धीरे कटाई का काम रफ्तार पकड़ रहा है। इलाके में ज्यादातर किसान हार्वेस्टर से धान तैयार करवा रहे हैं। कृषि अधिकारियों ने बताया कि लगभग 10 हजार हेक्टेयर में धान कटाई हो चुकी है। जाहिर तौर पर अभी भी इलाके में 25 हजार हेक्टेयर रकबे में धान की फसल पकाकर खड़ी है। ऐसे में आग लगाना खतरे से खाली नहीं है। क्योंकि कटाई के काम से निपटते ही रबी फसल की बोवनी के लिए खेतों की हांकजोत करने की जल्दबाजी में किसान तत्काल नरवाई में आग लगा रहे हैं। हालांकि कृषि विभाग द्वारा किसानों को आग लगाने के बजाए फसल अवशेष नष्ट करने के लिए खेत में ट्रैक्टर की मदद से हैरो चलाकर गहरी हंकाई करने की सलाह दी जाती है। लेकिन कृषि विशेषज्ञों की समझाइश का किसानों पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट एवं नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश पर भी अमल नहीं हो रहा है। रोक के बावजूद किसानों द्वारा नरवाई जलाने से ग्रामीणों की नींद उड़ी हुई है। खेतों में आग लगाने से वे किसान भी चिंतित हैं, जिनके खेतों में अभी धान की फसल पकड़कर तैयार खड़ी है। क्योंकि नरवाई की आग उनकी फसल तक पहुंच सकती है।

फसल अवशेष जलाना किसानों की मजबूरी


खेतों में नरवाई जलाना कानूनी अपराध है

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