उड़द-तिली नष्ट होने के बाद अब धान पर संकट सिंचाई के लिए सिर्फ तीन घंटे मिल रही बिजली

0
108

श्योपुर | Oct 08, 2018

अतिवृष्टि से खरीफ सीजन की उड़द, तिली व बाजरा की फसल की बर्बादी के बाद अब धान की फसल पर भी बिजली की बेतहाशा कटौती के चलते संकट खड़ा हो गया है। सिंचाई के अभाव में धान की फसल सूखने लगी है। किसानों का कहना है कि 3 से 4 घंटे बिजली मिल रही है। वह भी इतने कम वोल्टेज में दी जा रही है कि ट्यूबवैल पानी ही नहीं फेंक रहे हैं।

कई जगहों पर कम वोल्टेज के चलते ट्यूबवैल फुंक रहे हैं। इससे किसानों को आर्थिक क्षति पहुंच रही है। किसानों का कहना है कि पांच-सात दिन में बिजली की सप्लाई में सुधार नहीं होने पर धान की फसल बर्बाद हो जाएगी। उधर बिजली कंपनी 10 से 12 घंटे बिजली सप्लाई करने का दावा कर रही है। बिजली संकट को लेकर किसानों का आक्रोश जल्द ही सड़कों पर आ सकता है।

खरीफ की पहले ही 30 से 35 हजार हेक्टेयर फसल अतिवृष्टि से खराब हुई, अब धान की फसल सूखने की कगार पर

इस साल खरीफ सीजन किसानों के लिए घाटे का सौदा ही रहा है। खरीफ सीजन की पहले ही अतिवृष्टि से 30 से 35 हजार हेक्टेयर में खड़ी उड़द, तिली, बाजरा की फसल खराब हो चुकी है। सोयाबीन की फसल में भी करीब 40 फीसदी नुकसान होने से इस साल उत्पादन गिरा है। इस साल सबसे ज्यादा धान की फसल का 22 हजार हेक्टेयर रकबा है। इस वक्त धान की फसल में पानी की जबरदस्त मांग है, क्योंकि फसल फलाव पर है। सिंचाई के लिए किसानों को फुल वोल्टेज में 8 से 10 घंटे बिजली चाहिए। तब जाकर ठीक से फसल में पानी की पूर्ति की जा सकती है। कई जगहों पर तो सिंचाई नहीं होने के चलते फसल सूखने लगी है। धान के पौधे मुरझाने लगे हैं। किसानों की मानें तो जल्द ही बिजली सप्लाई में सुधार नहीं हुआ तो वे धान को भी अपने हाथ से गंवा देंगे। कई किसानों ने तो इस साल कर्ज लेकर धान की बोवनी की है।

धान की फसल सिंचाई के लिए जबरदस्त पानी मांग रही है, लेकिन किसानों की मजबूरी यह है कि उन्हें पर्याप्त बिजली ही नहीं मिल रही है। बिजली कंपनी का दावा किसानों को दी जा रही है 10 घंटे बिजली।

समय पर सिंचाई नहीं होने से बर्बाद फसल को दिखाते किसान।

10 सब स्टेशनों पर बिजली की कटौती होने से बिगड़े हालात, कम वोल्टेज में मिल रही 3 से 4 घंटे बिजली

धान की फसल का रकबा सबसे ज्यादा श्योपुर और कराहल विकासखंड में है। यहां के 10 सब स्टेशनों से बिजली सप्लाई का ढर्रा बिगड़ गया है। धान की फसल में सिंचाई के लिए पानी की जबरदस्त मांग है। किसानों को सिर्फ तीन से चार घंटे बिजली दी जा रही है। उसका वोल्टेज भी इतना कम है कि किसान फुंकने के कारण ट्यूबवैल चलाने से डर रहे हैं। इन सब स्टेशनों में धीरोली, जैनी, उतनवाड़, अलापुरा, बर्धा, अड़वाड व सोंठवा शामिल है। किसानों का कहना है कि इस सीजन में बिजली की भारी कटौती हुई है।

एक-दो दिन में बिजली नहीं मिली तो हम हाईवे पर चक्काजाम करेंगे


बिजली नहीं मिलने से किसानों के दर्द की कहानी इन दो उदाहरणों से जानिए

1. जैनी के किसान मंशाराम मीणा ने 8 बीघा के खेत में इस साल धान की फसल की बोवनी की है। गुजरे साल भी मंशाराम की फसल सूखा पडऩे से बर्बाद हो चुकी है। इस साल उन्होंने 1 लाख रुपए का कर्जा लेकर धान की फसल तैयार की है। आठ दिन से किसान मंशाराम को अब बिजली के अभाव में सिंचाई की चिंता सता रही है। उनका कहना है कि बिजली नहीं मिली तो फिर से उनके हाथ बर्बादी ही हाथ लगेगी।

2. प्रभूराम माली ग्राम कंवरसली के किसान हैं। इन्होंने अपने 10 बीघा खेत में से इस साल 7 बीघा में धान और 3 बीघा मेें उड़द फसल की बोवनी की थी। अतिवृष्टि से उड़द खराब हो चुकी है। अब धान की फसल पर भी सिंचाई का संकट आ गया है। प्रभूराम का कहना है कि 3 घंटे कम वोल्टेज में बिजली मिल रही है तो आस में उन्होंने ट्यूबवैल को चला दिया, जिससे वह फुंक गईं। कमोबेश यही स्थिति और भी किसानों के साथ बन रही है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here