शिवपुरी : आदिवासी महिलाओं ने शुरू की जैविक खेती, घर पर ही उगा रहीं हरी सब्जियां

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शिवपुरी May 06, 2019

गंभीर बीमारियों के चलते पहले सिर्फ 40 वर्ष थी औसत आयु

ग्रामीणों की माने तो गांव में वाटिका लगाने के चलन से पहले ग्रामीण आदिवासी खदानों व अन्य मजदूरी से डस्ट के शिकार होकर टीबी जैसी बीमारियों से ग्रस्त होकर 40 साल से पहले ही मौत के शिकार हो जाते थे, क्योंकि आदिवासियों को प्रोटीन युक्त सब्जियां नहीं मिल पा रही थी। लेकिन आदिवासी महिलाओं ने इन वाटिकाओं की शुरूआत की तो गांव में न केवल 70 साल तक के बुजुर्गों की संख्या में इजाफा हुआ है, बल्कि कुपोषण भी बच्चों से दूर भाग गया है, जिससे गांव में इन वाटिकाओं में इजाफा हुआ है।

इन गांवों में फल-फूल रही जैविक खेती की वाटिकाएं

जिले के बदरवास ब्लॉक के आदिवासी बाहुल्य ग्राम श्यामपुरा में तो नरवर के आदिवासी बाहुल्य किशनपुरा के अलावा ग्राम कोटरा-कोटरी गांव में आदिवासी महिलाओं ने अपने स्नान घरों व बर्तन साफ करने से निकलने वाले व्यर्थ के पानी से घर के पास जैविक खेती की वाटिकाएं लगाई हैं, जिससे न केवल घरों के आस-पास व आंगनों में हरियाली छा गई है बल्कि ताजी सब्जियां मिलने से रसोई में बनने वाले खाने में स्वाद ही बदल गया है। इसके अलावा भगवान को भी पूजा में ताज फूल चढ़ाने को मिल रहे हैं।

ऐसे मिली कुपोषण व गंभीर बीमारियों से निजात

श्यामपुरा की आदिवासी महिला कला बाई आदिवासी, भूरी आदिवासी, प्रेमला आदिवासी, भग्गो आदिवासी आदि की माने तो गांव में एकता परिषद के जिला समन्वय रामप्रकाश शर्मा ने गांव में वाटिका लगाने का सुझाव दिया, जिस पर पहले एक-दो महिलाओं ने वाटिका लगाई। जब इससे सब्जियां मिलने लगीं तो गांव में अब वाटिकाओं की संख्या बढ़कर एक दर्जन से अधिक हो गई है।

वाटिका से मिल रही है ताजी सब्जियां

घरों के पास स्नान घरों व बर्तन साफ करते समय व्यर्थ होने वाले पानी से हमने वाटिका लगाई है जिससे हमें ताजी सब्जियां व फूल मिल रहे हैं। जसोदा आदिवासी, निवासी श्यामपुरा

गांव में नहीं रहा कुपोषण

जब से गांव में वाटिकाएं लगाई गई हैं तब से हमें हरी धनिया, पोदीना के अलावा टमाटर सहित अन्य सब्जियां वाटिका में मिलने लगी हैं, जिससे सब्जी भी स्वाद में अच्छी बनती है और बच्चे ज्यादा रोटी खाते हैं, जिससे कुपोषण दूर भाग गया है। गांव में एक भी बच्चा कुपोषित नहीं है। गौरा अदिवासी, निवासी श्यामपुरा

70 साल तक के बुजुर्ग हंै 

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