किसानों पर पड़ रहा अतिरिक्त बोझ, महंगे दामों पर रासायनिक खाद खरीदने को मजबूर

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ठीकरी Oct 26, 2018

किसान रबी फसल की बोवनी के लिए खेतों को तैयार करने में लग गए हैं। वहीं गेहूं व चने की बोवनी के लिए जरूरी खाद महंगा हो गया है। इससे किसानों की परेशानी बढ़ी है। उल्लेखनीय है कि गेहूं व चने की बोवनी के लिए जरूरी खाद एनपीके (12.32.16) की एक बोरी 1150 रुपए की मिल रही है। इससे किसानों की लागत बढ़ेगी। उल्लेखनीय है कि इस बार खाद की बोरियों के दाम 10 से 15 फीसदी बढ़े हैं। इससे किसानों की लागत भी बढ़ेगी।

वहीं कृषि अधिकारियों ने किसानों को कम से कम रासायनिक खाद का उपयोग करने की सलाह दी है। ताकि खेती की लागत को कम किया जा सके। साथ ही अधिक से अधिक लाभ कमाया जा सके। वहीं भारतीय किसान संघ के उपाध्यक्ष नाना भाई चौधरी ने कहा कि सरकार ने कुछ ही सालों में खाद के दाम चार गुना महंगे कर दिए हैं। इसे जल्द ही कम करना होगा। उन्होंने जल्द ही आवेदन देकर खाद के दाम करने की मांग करने की बात कही है।

अंजड़ क्षेत्र की बात करें तो लगभग पूरे क्षेत्र में मप्र फर्टिलाइजर कार्पोरेशन याने मार्फेड के माध्यम से अंजड़, ठीकरी, राजपुर और कुछ क्षेत्र बड़वानी तहसील के हैं। यहां पर रासायनिक खाद यहां से पहुंचाया जाता है। अंजड़ मार्फेड गोदाम में भंडारण की क्षमता लगभग 8000 मीट्रिक टन खाद कि बनाई हुई है। जबकि अंजड़ क्षेत्र में 2000 मीट्रिक टन खाद की जरूरत रहती है। वहीं ठीकरी और राजपुर ब्लाॅक में लगभग 7 से 8 हजार मीट्रिक टन खाद की जरूरत रहती है।

कृषि वैज्ञानिकों की सलाह जरूरी होने पर ही डाले खाद

गोदाम में रखी खाद की बोरियां।

खाद के दाम महंगे होने से किसानों को खरीदने में भारी परेशानी उठानी पड़ रही है, उचित मात्रा में सब्सिडी नहीं

सरकार किसानों को खाद पर 25 रुपए की सब्सिडी दे रही है। सरकार की ओर से खाद पर सब्सिडी देने का कोई प्रावधान नहीं है। महंगे दाम पर खाद मिलने से किसान खेतों में गेहूं और चना की बोवनी करने की बजाय मक्का बोने कि तैयारी में लगे हैं। वहीं कृषि अधिकारी आवश्यक्ता के अनुसार ही रासायनिक उर्वरकों के उपयोग की बात कर रहे हैं। किसान सचिन यादव, अनिल परिहार, नाना चौधरी ने बताया कि खाद के दाम महंगे होने से खाद खरीदने में भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। खाद पर उचित मात्रा में सब्सिडी नहीं मिल पाने से किसान लुट रहे हैं। केंद्र सरकार व प्रदेश सरकार को विभिन्न खादों के दाम किसान हित में कम करने चाहिए। ताकि किसान खेती के कार्य को का सके। वहीं खाद कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि खाद की कोई कमी नहीं है। 12.32.16 खाद की बोरी का मूल्य लगभग 1150 रुपए है। प्रति बोरी किसान को 25 रुपए की सब्सिडी दी जा रही है।

आवश्यक होने पर ही डाले रासायनिक खाद

ब्लाॅक कृषि विस्तार अधिकारी जेसी पाटीदार ने बताया किसानों को निर्धारित मात्रा में ही रासायनिक खाद का उपयोग करना चाहिए। आवश्यक्ता होने पर ही मात्रा को बढ़ाना चाहिए। गेंहू, डाॅलर चना, सोयाबीन, कपास, मक्का आदि सभी फसलों के लिए प्रति एकड़, हेक्टेयर अनुसार निर्धारित मात्रा में अपनी उपजाऊ भूमि पर डालना उचित रहता है। किसी भी प्रकार कि समस्या के लिए अपने-अपने क्षेत्र के ग्राम सेवक से भी जानकारी ली जा सकती है।

बढ़े खाद के भाव

यूरिया पुराना भाव 295 -266.50 रुपए,

डीएपी 1076- 1400 रु.,

पोटाश 578 -945रु.,

सिंगल सुपर फास्फेट पावडर 265 -260रु.,

सुपर दानेदार 294- 289 रु.,

एनपीके 12.32.16 -1061 -1150 रुपए प्रति बोरी में मिल रहा है।

जिन रासायनिक उर्वरकों कि बोरियों पर पिछली दर और उत्पादन वर्ष वे उसी दाम पर मिलेंगी

माफेड खाद गोदाम प्रभारी रामसिंह गोलकर ने बताया जिन रासायनिक उर्वरकों कि बोरियों पर पिछली दर और उत्पादन वर्ष अंकित है वो कम दर पर ही विक्रय होंगी। जिन नए दरों को शासन ने बढ़ाया है। उसमें दोनों टैक्स को जोड़कर दर अंकित होगी। वो बढ़ी दर पर किसानों को विक्रय की जाएंगी।

20 अक्टूबर तक सोसायटियों पर खाद बिक्री के ये हैं भाव

यूरिया 295 रुपए-50 किलो, यूरिया 266.50 रुपए 45 किलो, इफको 12.32.16 के भाव 1150रुपए प्रति बोरी, डीएपी 1250रुपए, सुपर 259.88 रुपए, पोटाश 659.50रुपए।

खाद की बिक्री के भाव सरकार तय करती है 

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