पांच घंटे कतार में लगे, तब मिली दो बोरी यूरिया

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उज्जैन Nov 21, 2018

यूरिया का संकट कम होने की जगह बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को कृषि उपज मंडी खुली तो उपज लेकर आए किसान यूरिया के लिए भटकते नजर आए। मंडी परिसर में चार संस्थाओं पर 2240 बोरी यूरिया आया था। इसके बावजूद यूरिया की एक-एक बोरी के लिए किसान शाम 7 बजे तक कतार में लगे रहे। उपज बेचने आए किसानों के कतार में लगने का क्रम सुबह 9 बजे से शुरू हो गया था। चंदेसरा के किसान गोकुल रावल के अनुसार जिले की 22 सहकारी संस्थाओं में 35 हजार सदस्य हैं। जब उन्हें वहीं से यूरिया नहीं मिलता तो वे भटकते-भटकते मंडी में आते हैं। यहां कुछ निजी तो कुछ सहकारी संस्थाएं हैं जिन्हें यूरिया प्रदाय किया जाता है। किसान गौरीशंकर मेहता बताते हैं कि यूरिया के लिए इतनी लंबी लाइन कई साल पहले लगती थी। उन्होंने कृषि विभाग के अफसरों पर लक्ष्य तय नहीं करने का आरोप भी लगाया। साथ ही मांग समय पर नहीं भेजने की बात कही। उनका कहना है कि कृषि विभाग के अफसरों को पता है कि जिले में कितने रकबे में गेहूं की बोवनी हुई है। ऐसे में उन्हें चाहिए कि वे कम से कम उतने रकबे के लिए ताे यूरिया मंगवाएं। उससे कम क्यों मंगवाते हैं। उधर, डीडीए सीएल केवड़ा ने बताया यूरिया की सप्लाय के लिए सतत प्रयास कर रहे हैं। एक-दो दिन में निजी कंपनी से 3100 टन का रैक भी आने वाला है। उन्होंने किसानों से सेवा सहकारी संस्थाओं से यूरिया लेने का आग्रह किया। साथ ही यह भी कहा है कि यूरिया के लिए सरकार ने जो कीमत तय की है उससे ज्यादा न दें। कोई इससे ज्यादा कीमत ले रहा है तो शिकायत दर्ज कराएं।

इसलिए बढ़ रही यूरिया की मांग

किसानों का कहना है कि यूरिया की दरकार सिंचाई के वक्त होती है। गेहूं की बोवनी करने के बाद सिंचाई के समय यूरिया मिल जाए तो पौधे की बढ़वार अच्छी तरह से होती है। यूरिया मिलने में दो-चार दिन की देरी होने पर सिंचाई में भी देरी हो जाती है। इसका असर गेहूं के पौधों पर पड़ता है। वे पीले पड़कर सूखने लगते हैं। किसानों का कहना है कि एक सप्ताह बाद या एक महीने बाद यूरिया आने पर उसका कोई उपयोग नहीं रहने वाला।

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