भावांतर की जगे फसला रा दाम बढ़ाई दे तो योजना री जरूरत कोनी

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महिदपुर Nov 20, 2018

कृषि उपज मंडी में चर्चा

मोहन : कणी की भी सरकार आवे जावे आपणे तो कणी पाल्टी ती मतलब कोनी है, खाली विकास ती मतलब है। जो विकास करेगा उकाे साथ दांगा।

गोविंद आलाखेड़ा : सरकार भावांतर तो दई री है, लेकिन अपनी फसला का दाम बढ़े अनी पे विचार कौनी करे। यदि दाम बड़िया हुआ मिलेगा तो भावांतर देवा की जरूरत कोनी ने किसान हुन के भी पुरो लाभ मिलेगा।

लालसिंह : या वात तो सांची है। कम ती कम हव क्वालिटी की सोयाबीन का 4 हजार रुपए तो मलना चाहे। दाडकी, मेहनत, और लागत ना वाजिब दाम तो मली जाए।

राधेश्याम : सरकार ने किसाण वाती खाद की पूर्ति वाते ध्यान देनो चाहिए, बाजार ती खाद की बोरी लेवा जावां तो घणी मेहंगी पड़े। अणी बार तो खाद ही नी मल्यो बताओ……

भेरूसिंह : गर्मी की टेम पर तहसील का नरा गाम में पाणी की व्यवस्था कौनी है। वां पे टंकी लाग जाए तो गाम वाला के सुविधा वेगा।

महिदपुर | तहसील में विधानसभा चुनाव काे लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। जिसके चलते हर गली, मोहल्लों, चौराहों व होटलों एवं चौपालों पर सिर्फ चुनावी चर्चा चल रही है। सभी प्रत्याशी क्षेत्रवासियों का मन जीतने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। प्रत्याशी लगातार अंचल में जनसंपर्क कर रहे है। इसमें सभी उम्मीदवार रहवासियों से अलग-अलग प्रकार के वादे कर रहे हैं लेकिन जब रहवासियों का मन टटाेला तो इनका मत काफी अलग है।

पुराने बस स्टैंड पर होटल पर चर्चा

प्रकाश – नगर री सड़का रो हाल किसे छूपयो कौनी है। ऐसो लगे आज भी वाज हाल जाे 20 साल पेला थी। आज भी नगर में कई बदलाव कौनी दिखे। अस्पताल में देखों तो डाक्टर होन तो है पर बड़ी जांच की सुविधा कई नी। सोनाग्राफी, एक्स रा वाते भागीने उज्जैन-इंदौर जानो पड़े। जिमे नरो खर्चो हुई जाए।

रोहित कुमार – कामकाज का बारा में भी कोई ध्यान नी देवे। आज अतरा बरस हुई ग्या कोई ने भी कारखानो कोनी लगायो। अपना या का छोरा होन बाहर जाईने काम करनो पड़े।

संतोष – नदि का बारा में भी कोई नी विचार करे। लोग केवे कि पीने को पानी है। अईने किसान केवे खेता को पानी। इ चक्कर में न खेता ने पानी मिले न लोग के पीवा वाते बचे। इनी ओर भी नेता होने के ध्यान देनो चाए।

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