मालवा के गेहूं की गुजरात में बढ़ेगी मांग

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उज्जैन | Nov 25, 2018

गुजरात गेहूं से सूना, मालवा का गेहूं यहां खूब बिकेगा। मालवा में पानी की कमी से गेहूं की बाेवनी कम किए जाने की खबर है। जबकि गुजरात में गेहूं लायक बारिश नहीं हो पाई। मालवा की मिट्टी उपजाऊ होने के साथ पानी सोखने की क्षमता वाली है। गेहूं का बड़ा व्यापार गुजरात का वर्षों से होता आया है। गुजरात व्यापार के जानकार व्यापारी तो बारिश का रुख देखकर ही अगली गेहूं का व्यापार मालवा में बांधने लगते हैं। ऐसे करार होने के बाद सीजन में गेहूं की एकतरफा सप्लाई शुरू हो जाती है। गेहूं के बढ़ते भाव इस समय 10 से 20 रुपए कम हो गए हैं। भाव कमी का कारण भारतीय खाद्य निगम का प्रति हफ्ते लाखों बोरी गेहूं का विक्रय होना माना जा रहा है। मिलर्स को रैक पाइंट सेंटर का 1925 रुपए में गेहूं मिलने से अब लोकल में ही इस प्रकार का व्यापार किया जा रहा है, लेकिन आगे 50 से 100 रुपए की मंदी नए सिरे से आने की संभावना है। मंडी के 2-3 व्यापारियों के पास मिल क्वालिटी गेहूं का बड़ा स्टाॅक होना माना जा रहा है। आटा व्यापार बढ़ता जा रहा है तीन माह गेहूं व्यापार के होने से भाव में कोई खास कमी नहीं आएगी ऐसी चर्चा है।

मावठे का इंतजार : मालवा के किसान मावठे की बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। गेहूं उपज पर निजी संसाधनों से सिंचाई की जा रही है। मावठे के आसार भी बन रहे। अगर मावठा अच्छा गिरा तो मालवा में गेहूं की उपज बेहतर रहेगी। पोषक, पूर्णा गेहूं की बोवनी अधिक रकबे में होना बताया गया है।

सोयाबीन की तेजी का भविष्य विदेशी सौदाें पर निर्भर : डीओसी के अंतर्राष्ट्रीय सौदे इस बार नहीं होने से सोयाबीन के भाव भी बढ़ नहीं पाए हैं। पिछले साल 2600 से 2800 रुपए के भाव पर व्यापारी स्टॉक खूब किया गया था। इस साल 3000 से 3100 रुपए के भाव होने से नाममात्र का स्टॉक ही हो पाया है। पिछले साल 2800 वाला सोयाबीन भावांतर समाप्त होते ही 3500 से 3700 रुपए बिकने लगा था। ऐसे में शुरुआती दौर में ही 500 से 600 रुपए बोरी का फायदा मिल गया था। इस साल व्यापार खामोश होने से धन तंगी का सामना भी इस मार्केट में होने लगा है। उधार धन ब्याज वाला भी भारी पड़ रहा है। नोटबंदी के बाद और मंडी से नकद सुविधा नहीं मिलने से कृषि व्यापार आधा रह गया। किसानों को ऊंचे भाव चाहिए तो इंतजार करना पड़ता है। कम भाव मानकर ही किसान मंडी में बंपर आवक में सोयाबीन नहीं बेच रहे हैं। सोयाबीन का बिल्टी व्यापार पानी के कारण खासा फेमस हो गया है।

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