कैचमेंट एरिया में कम बारिश से जिले के छह बड़े तालाब 45 से 80% खाली, धान-रबी की फसलों में सिंचाई का संकट

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विदिशा | Oct 08, 2018

बीते साल के मुकाबले इस बार जिले की औसत बारिश 20 सेमी से अधिक होने के बावजूद कैचमेंट एरिया में हुई कम बारिश के कारण बड़ी-बड़ी सिंचाई परियोजनाएं और तालाब खाली रह गए हैं। हालत ये है कि जिले के अधिकतर तालाब और सिंचाई परियोजनाएं 45 से लेकर 80 फीसदी तक खाली रह गई है। इसके चलते कई जगह पलेवा के बाद सिंचाई के लिए कुछ ही मात्रा में पानी मिलने की स्थिति बन गई है। जिले की सामान्य औसत बारिश 132 सेमी मानी जाती है। इस लिहाज से बारिश 27 सेमी कम हुई है। जबकि बीते साल हुई जिले में सामान्य औसत बारिश 84.66 सेमी दर्ज की गई थी। जबकि इस साल जिले में 105.15 सेमी बारिश दर्ज हुई है। जो बीते साल की तुलना में 20 सेमी अधिक है

जिला जल उपयोगिता समिति के अध्यक्षों की बैठक में खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए नहरों में पानी छोड़ने का निर्णय लिया गया है। इस आधार पर 30 अक्टूबर से 5 नवंबर के बीच सिंचाई विभाग के तहत आने वाले 58 तालाबों से पानी छोड़ने का निर्णय लिया गया है। अभी धान की फसल खेतों में है। पहले इसकी सिंचाई के लिए पानी की आपूर्ति की तैयारी की जा रही है। इसके बाद पलेवा के लिए पानी छोड़ना होगा। तब जाकर रबी फसल की बोवनी होगी। इतना ही नहीं रबी फसल के लिए पलेवा के बाद तीन बार पानी की जरूरत होती है। कमी के चलते इस बार इतना पानी किसानों को मिलने की संभावना नहीं है।

जिले में इस बार सामान्य औसत 132 सेमी से 27 सेमी कम हुई है बारिश, किसान हो रहे परेशान

ये तालाब 100 फसीदी भरे

तालाब का नाम जल स्तर

(सभी आंकड़े -मिलियन क्यूबिक मीटर में है।

50 फीसदी खाली है ये तालाब

नाम कितना खाली

इस साल कहां कितनी बारिश (सेमी में)

वर्षामापी केंद्र इस साल बारिश बीते साल बारिश

औसत वर्षा: 105.15 84.66

इस बार साढ़े छह फीट खाली है हलाली डेम।

इन तालाबों में जमा हो पाया 20 फीसदी पानी

तालाब का नाम क्षमता जल स्तर प्रतिशत

इसलिए पड़ी पानी की जरूरत: जिले में इस बार करीब एक लाख 40 हजार हेक्टेयर रकबे में धान की फसल लगाई गई है। पहले बारिश में देरी हुई तो किसानों ने पानी के निजी संसाधनों के उपयोग से धान की फसल लगाना पड़ी। बीच में बारिश हुई। लेकिन अब बीते एक सप्ताह से बारिश नहीं होने और तेज धूप के कारण धान की फसल सूखने लगी है। इसके चलते जिले भर से धान की फसल के लिए नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग आ रही है।

रायसेन- विदिशा को हलाली से मिलता रहेगा पानी

रायसेन और विदिशा में पेयजल की सप्लाई के लिए पानी रिजर्व रखा जाएगा। सम्राट अशोक सागर परियोजना के एसडीओ रविंद्र जैन के मुताबिक विदिशा और रायसेन के लिए पानी सुरक्षित रखा जाएगा। दोनों के लिए ही 5-5 एमसीएम पानी रखा जाता है। इससे गर्मियों के दिनों में भी पेयजल सप्लाई के लिए पानी दिया जा सके। हालांकि इस बार कम बारिश के चलते डेम का जल स्तर 1501.5 एमसीएम है। जबकि डेम की जल भराव क्षमता 1508 एमसीएम है। इस तरह से हलाली डेम इस बार साढ़े छह फीट खाली है।

बड़ी परियोजनाएं भी 45 प्रतिशत खाली

जिले में बारना और हलाली दो बड़ी सिंचाई परियोजनाएं हैं। इनमें बारना सिंचाई परियोजना को प्रमुख माना जाता है। इस एक मात्र परियोजना से जिले में 65 हजार हेक्टेयर रकबे में फसलों की सिंचाई की जाती है। बारिश के सीजन में बारना 45 प्रतिशत खाली रह गया है।

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