धान खरीद केंद्र बनेंगे राजनीतिक अखाड़े, नेताओं ने भी शुरू की तैयारी

0
151

29 Oct 2018

रायपुर

 चुनाव सिर पर हैं, पहले चरण के मतदान के लिए महज 15 दिन बचे हैं, नेता गांव-गली-मोहल्लों की खाक छान रहे हैं और किसान खामोश हैं। छत्तीसगढ़ के वोटरों में 70 फीसद किसान हैं। जाहिर है उनकी चुप्पी से नेता परेशान हैं। किसानों का स्वर सुनने के लिए एक नवंबर का इंतजार किया जा रहा है। एक नवंबर से प्रदेश में समर्थन मूल्य पर धान खरीद की शुरूआत होने वाली है।

प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। खरीद केंद्रों में तौल के लिए रखे गए बांटों का सत्यापन किया जा रहा है, कंपूयटरों को फार्मेट कर फाइलें दुरूस्त की जा रही हैं, दीवारों पर धान का समर्थन मूल्य लिखा जा रहा है, बताया जा रहा है कि इस बार कितना बोनस मिलेगा। राजनीतिक स्तर पर भी धान खरीद की तैयारियां चल रही हैं। नेता इंतजार कर रहे हैं कि कब किसान खरीद केंद्रों में पहुंचें, कायकर्ता किसानों को बांटने के लिए पर्चे तैयार कर रहे हैं। तैयारी किसान भी कर रहे हैं। धान को बारों में भरा जा रहा है। खेत से खलिहान और घर तक चक्कर लग रहे हैं। बैलगाड़ियों के पहिए में ग्रीस डाली जा रही है। बैलों को खिला पिलाकर तंदरूस्त किया जा रहा है। यह धान बेचने की तैयारी भर नहीं है। प्रदेश के दो हजार धान खरीद केंद्र इस बार राजनीतिक अखाड़े बनने वाले हैं।

पहली बार एक नवंबर से धान खरीद 
छत्तीसगढ़ में हर साल 15 नवंबर से धान खरीद होती थी लेकिन इस बार चुनाव हैं तो खरीद की शुरूआत एक नवंबर से ही हो जाएगी। 12 नवंबर को पहले चरण और 20 नवंबर को दूसरे चरण की सीटों पर वोट डाले जाएंगे। इस बीच सात नवंबर को दीपावली का त्योहार भी है। कोशिश है कि दीपावली और मतदान से पहले किसानों के खाते में धान की कीमत और बोनस पहुंच जाए। धान का समर्थन मूल्य और बोनस राजनीतिक मुद्दा रहा है।

विपक्ष आरोप लगाता है कि सरकार ने पिछले चुनाव के घोषणापत्र में 2100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य और तीन सौ रुपये बोनस देने का वादा किया था जिसे पूरा नहीं किया गया। सरकार ने इस साल समर्थन मूल्य बढ़ाया है। 1590 रुपये वाला ए ग्रेड धान इस बार 1770 में और 1550 वाला मोटा धान 1750 रुपये में खरीदा जाएगा। तीन साल बोनस नहीं बांटा गया लेकिन चुनावी साल आते ही सरकार 300 रुपये प्रति क्विंटल बोनस बांटने लगी। बाकयदा बोनस तिहार मनाया गया। अब इस बार धान के समर्थन मूल्य के साथ जोड़कर बोनस दिया जाएगा।

इसके लिए चुनाव से ऐन पहले विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर 24 सौ करोड़ का अनुपूरक बजट लाया गया। सरकार ने किसानों को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है लेकिन विपक्ष कहां मानने वाला है। कांग्रेस समेत दूसरे विपक्षी दल समर्थन मूल्य ढाई हजार तक करने की बात कर रहे हैं। याद दिला रहे हैं कि सरकार ने तो हर साल बोनस देने का वादा किया था फिर तीन साल का बोनस क्यों नहीं दिया। कांग्रेस कह रही हम आए तो तीन साल का बकाया बोनस भी तुरंत दे देंगे। किसानों की कर्जमाफी भी कांग्रेस का बड़ा दांव है। धान खरीद शुरू होने से पहले मोर्चे सज गए हैं। नेताओं ने खरीद केंद्रों में प्रचार करने की रणनीति तैयार कर ली है।

राजनीति का मंच बनेंगे खरीद केंद्र
प्रदेश में करीब 32 लाख किसान हैं। इनमें से 12 लाख पंजीकृत किसान हैं और अपना धान सरकारी केंद्रों में बेचते हैं। किसानों को धान बेचने के लिए लाइन में लगना पड़ता है। कई बार दो-दो दिन तक बैलगाड़ी में ही खरीद केंद्र में ठिकाना बनाना पड़ता है। ऐसे में खरीद केंद्र प्रचार के लिए सबसे बेहतर जगह होने जा रही है। चुनाव सिर पर हैं तो राजनीतिक चर्चा ही होगी। यहीं रणनीति बनेगी कि किसपर भरोसा किया जाए और किसपर नहीं।

अफसर-कर्मी की दोहरी जिम्मेदारी
खरीद शुरू होने में अब तीन दिन ही शेष हैं। शनिवार को खाद्य विभाग की प्रमुख सचिव ऋचा शर्मा रायपुर और महासमुंद जिलों के खरीद केंद्रों में तैयारियों का जायजा लेने निकलीं। नईदुनिया से कहा-इस बार यहां धान का रेट तीन सौ रुपये ज्यादा मिल रहा है तो पड़ोसी राज्यों से धान आने की ज्यादा संभावना है। उड़नदस्ता दलों को सतर्क किया जा रहा है। कर्मचारी चुनाव और धान खरीद की दोहरी जिम्मेदारी में होंगे इसलिए हमने कह दिया है, कोई कोताही न हो। सारा काम 31 अक्टूबर तक पूरा कर लें ताकि चुनाव ड्यूटी आराम से कर पाएं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here