39 हल्कों में सिर्फ 23 पटवारी, 98 गांव के 65 हजार किसान हो रहे परेशान

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श्योपुर | Sep 27, 2018

शासन की नीति के तहत प्रत्येक पटवारी हलके में एक पटवारी की नियुक्ति अवश्य होनी चाहिए। लेकिन जिले की बड़ौदा तहसील में ऐसा नहीं हो रहा है। लंबे समय से बड़ौदा तहसील के 39 हलके 23 पटवारियों के भरोसे पर चल रहे हैं। एक पटवारी पर दो हलकों का प्रभार होने से अधिकांश हलकों में काम नहीं हो रहा है। तहसील के प्रत्येक हलके में 98 गांव के किसान परेशान हो रहे हैं। न तो समय पर नकल और राजस्व संबंधी काम हो पा रहा है और न ही समय पर किसानों को शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल पा रहा हैं।अधिकारी की गैर मौजूदगी में तहसील कार्यालय में कार्यरत बाबू और अन्य कर्मचारी भी मनमानी कर रहे हैं।

बड़ौदा तहसील के 98 गांवों का ग्राम पंचायत के मान से इकाई मानकर 39 पटवारी हलकों में विभाजित किया गया है। इन 39 हलकों में वर्तमान में 23 पटवारी पदस्थ है। जबकि 16 हलके पटवारी विहीन हैं। पदस्थ महज 23 पटवारियों में प्रत्येक पटवारी के पास दो से तीन हलकों के प्रभार होने की वजह से पटवारी किसी भी हलके में राजस्व संबंधी कार्य नहीं कर पा रहे हैं।

जिसका खामियाजा 98 गांव के लगभग 65 हजार किसानों को भुगतना पड़ रहा है। नामांतरण, फ ौतीनामांतरण, बंटवारा,सीमांकन कार्य से लेकर खसरा-खतौनी की नकल के लिए 100 से 150 किसान किसान रोजाना तहसील कार्यालय और पटवारियों के चक्कर लगा रहे हैं। कई पटवारी श्योपुर और अन्य जगह रहकर ही नौकरी करते हैं। ये पटवारी महीनों तक हलकों में आने वाले गांवों में नहीं पहुंच पा रहे हैं। इससे क्षेत्र के किसान अपनी समस्याओं का निराकरण नहीं कर पा रहे हैं। किसानों की समस्याओं के निराकरण की मांग समय-समय पर किसान संगठनों, राजनीतिक दलों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा शासन से की जा रही है। लेकिन शासन का इस ओर ध्यान ना देना किसानों की समस्याओं को बढ़ावा दे रहा है।

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