रकबा 40% कम पर आलू का उत्पादन 4 गुना ज्यादा मौसम ने दिया साथ तो बढ़ी किसानों की आमदनी

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Oct 01, 2018

आलू की खेती के लिए इस बार बारिश अच्छी हुई। नतीजा पाठ क्षेत्र में आलू की फसल लहलहा रही है। इस वर्ष जितने किसानों ने आलू की फसल लगाई है उनकी कमाई चार से पांच गुना तक बढ़ सकती है। क्योंकि लोकल मंडी में ही आलू के अच्छे खासे दाम मिल रहे हैं। लोकल बाजार में आलू 16 रुपए किलो की दर से बिक रहा है। वहीं बनारस व इलाहाबाद की मंडी में भी आलू की मांग बढ़ी है। ज्यादा मुनाफा के लिए किसान व व्यापारी आलू को बाहर की मंडी में ले जाने की बात कह रहे हैं।

पिछले साल की तुलना में इस वर्ष आलू की फसल 40 प्रतिशत कम भू-भाग पर लगी है। पर इस बार मौसम ने किसानों का साथ दिया है। रिस्क लेकर जिन किसानों ने इस बार आलू लगाया है उनके नुकसान की भरपाई भी होगी और मुनाफा भी मिलेगा। क्योंकि इस वर्ष अच्छे साइज के आलू निकल रहे हैं और उनकी क्वालिटी भी अच्छी है। कीट व्याधि व आलू में होने वाले रोग भी इस बार फसलों को नहीं लगे क्योंकि बारिश व धूप का मौसम बहुत कम रहा। किसानों ने आलू निकालना शुरू भी कर दिया है। अक्टूबर माह के अंत तक पाठ क्षेत्र में लगे सभी आलू लगभग निकाल लिए जाएंगे।

बगीचा तहसील के पंड्रापाठ, सन्ना सहित आसपास के पाट क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आलू की खेती की जाती है। पाठ क्षेत्र की ढालू जमीन,मिट्टी सहित अन्य भूगौलिक परिस्थितियां आलू उत्पादन के लिए बेहद अनुकुल हैं। शासकीय योजनाओं का लाभ लेकर पाट क्षेत्र के किसान बंजर पड़ी जमीनों में आलू की फसल ले रहे हैं। पाट क्षेत्र में आलू की खेती लगभग 17 साल पहले हुई थी। इस सीजन में आलू उत्पादक किसानों के सामने सबसे बड़ी मुसीबत इसके बीज की कीमत में हुई बेतहाशा वृद्वि की थी। जानकारी के मुताबिक जिले के पाट क्षेत्रों में तीन प्रकार के आलू की बीज की बुआई की जाती है। इसके अलावा बीते कई सालों से आलू की फसल से किसानों को नुकसान हो रहा था। इसलिए इस वर्ष बीते साल की तुलना में 40 प्रतिशत कम भू-भाग पर आलू की फसल लगी थी।

जिले में कोल्ड स्टोरेज के साथ समर्थन मूल्य में आलू की खरीदी की मांग लंबे समय की जा रही

अधिक दाम पर बीज लेकर लगाया आलू

किसान कृपा यादव और वाल्मिकी यादव ने बताया कि इस वर्ष उन्होंने बढ़ी हुई कीमत पर आलू का बीज खरीदा थ। सबसे सस्ता बीज माना जाने वाला आगरा गुल्ला की कीमत में 8 रुपए प्रति किलो की वृद्वि हुई है। बीते सीजन में इस बीज की कीमत 12 रुपए किलो थी,जो बढ़ कर 20 रुपए किलो जा पहुंची है। इसी तरह कुपरी बादशाह प्रजाति के आलू बीज की कीमत 13 रुपए से बढ़ कर 17 रुपए और ज्योति की कीमत 17 रुपए से बढ़ 24 रुपए प्रति किलो के उच्च स्तर पर जा पहुंची है। बढ़ी हुई कीमत के बावजूद इस वर्ष भी उन्होंने आलू की ही फसल लगाई। क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि इस वर्ष उत्पादन अच्छा होगा।

बाहरी मंडी के लायक हुआ है आलू

जिले में आलू की फसल की उत्तर प्रदेश की मंडी पर आश्रित है। यहां के इलाहाबाद, बनारस, लखनऊ, आजमगढ़ सहित अन्य छोटी बड़ी मंडियों में किसान अपनी फसल को बेचते हैं। इन मंडियों में सबसे अधिक मांग ज्योति प्रजाति के आलू की होती है। इस प्रजाति का आलू गोल और चमकदार होती है। इससे खुदरा बाजार में इसकी पूछ परख अधिक होती है। इस वर्ष ज्योति के बीज की कीमत में हुई बेतहाशा वृद्वि ने किसानों का मनोबल तोड़ कर रख दिया था। पर जिन्होंने लगाया उनका उत्पादन अच्छा हुआ है।

वर्ष 2016 में हुआ था भारी नुकसान

नवापारा के किसान कांता यादव, चुंदापाठ के किसान कृपा यादव व हरिशंकर यादव ने बताया कि वर्ष 2016 में किसानों को नुकसान उठाना पड़ा था। इस साल उप्र के मंडियों से 7 से 8 रुपए किलो की ही किसानों को मिल पाई थी। फसल की लागत भी नहीं मिल पाने से कई किसान कर्ज में डूब गए थे। जिले में बाजार के अभाव का सबसे अधिक नुकसान छोटे किसानों को उठाना पड़ता है। जिले में कोल्ड स्टोरेज के साथ समर्थन मूल्य में आलू की खरीदी की मांग लंबे समय से आलू उत्पादक किसान करते रहें हैं।

बाहर की मंडी पर निर्भर है खेती

जिले में आलू उत्पादक किसानों की मुख्य समस्या फसल को बेचने की है। सेमरा निवासी किसान महेंद्र यादव ने बताया कि क्षेत्र के किसान फसल बेचने के लिए इलाहाबाद, बनारस, लखनऊ की मंडी पर निर्भर हैं। बगीचा से इन मंडियों की दूरी लगभग 5 सौ किमी पड़ती है। मंडियों तक फसल को पहुंचाने के लिए 19 रुपए प्रति टन के हिसाब से भाड़ा चुकाना पड़ता है। एक ट्रक का भाड़ा लगभग 40 हजार रुपए बनता है। कृषक महेन्द्र यादव ने बताया कि कभी-कभी ऐसी स्थिति भी आ जाती है जिससे किसानों को भाड़ा चुकाने के बाद लाभ के नाम पर एक पैसा ही नहीं बचता। पर इस वर्ष ऐसी स्थिति नहीं आएगी।

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