वीआईपी का हेलीकॉप्टर खेत में उतरा तो किसान से लेना होगी एनओसी

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रायसेन Nov 17, 2018

बीते साल बेगमगंज में खाद की लंबी लाइन में लगे हुए एक किसान की मौत हो गई थी। इसके बावजूद इस साल भी खाद की उपलब्धता में कोई सुधार नहीं हुआ है। मांग की तुलना में 54 हजार 138 मीट्रिक टन खाद की कमी बनी हुई है। इसके चलते किसानों को अपनी जरूरत का खाद निजी दुकानों से खरीदना पड़ रहा है।

जिले में इस बार भी रबी सीजन में रासायनिक खाद का बड़ा टोटा बना हुआ है। हालत ये है कि जिले में 72 हजार 500 मीट्रिक टन खाद की जरूरत है। इसके विरुद्ध मात्र 18 हजार 362 मीट्रिक टन खाद की उपलब्धता बताई गई है। इसमें से 12 हजार 449 मीट्रिक टन खाद का वितरण किसानों को किया जा चुका है। जबकि 54 हजार 138 मीट्रिक टन की कमी बनी हुई है।

इसके चलते रासायनिक खाद के लिए किसान समितियों के सामने लाइन लगाए खड़े हुए है। तो कहीं निजी दुकानों से उन्हें मजबूरी में खाद खरीदना पड़ रहा है। इतना ही डीएपी की खादी की कीमत भी बढ़ गई है। यह स्थिति डीएपी, यूरिया और सिंगल सुपर फास्फेट की बनी हुई है। इसके चलते किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

जिले में 12 हजार 449 मीट्रिक टन खाद का वितरण किसानों को किया जा चुका है

खाद लेने निजी दुकानों में पहुंच रहे हैं किसान।

एक साल में 364 रुपए बोरी बढ़े डीएपी के दाम

इस साल रासायनिक खाद की उपलब्धता तो नहीं बढ़ी,लेकिन दाम जरूर बढ़ गए हैं। बीते साल 50 किलो वाली डीएपी खाद की बोरी 1086 रुपए मे मिलती थी। अब इसी एक बोरी के लिए किसानों को 1450 रुपए चुकाना पड़ रहे हैं। एक साल में ही डीएपी खाद की बोरी के दामों में 364 रुपए की बढ़ोतरी हुई है। इसके चलते महंगा खाद भी किसानों को काफी मशक्कत के बाद मिल रहा है।

ऐसे समझंे किसानों की परेशानी

कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक खाद की स्थिति

बीते साल खाद की लाइन में मर चुका है किसान

बीते साल भी किसान खाद की कमी से जूझते रहे। इतना ही नहीं एक किसान की खाद की लाइन में लगे हुई ही मौत हाे चुकी है। बेगमगंज के धुआर गांव निवासी किसान सुदामा प्रसाद सेन 28 नवंबर 2018 को समिति के गोडाउन पर खाद लेने पहुंचे लेकिन उन्हें खाद नहीं मिला। इसके बाद वे 29 नवंबर को फिर खाद के लिए लाइन में आकर लग गए। इसी बीच उन्हें अटैक आ गया और उसकी मौत हो गई। इसके बाद गुस्साए किसान और कांग्रेसियों ने भोपाल-सागर रोड़ पर चक्काजाम कर दिया था।

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