सरसों की बंपर पैदावार लेने के लिए 25 तक करे बुआई, देरी होने पर घटेगा उत्पादन

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खंडवा Oct 09, 2018

मध्यप्रदेश में सरसों की सालाना अच्छी पैदावार होती है। इस बार अच्छी आमदनी सरसों से लेने को किसान 15 अक्टूबर तक सरसों की बिजाई कर लें। सरसों की पैदावार हल्की से भारी दोमट मिट्‌टी में अच्छी होती है। इसमें प्रति एकड़ सवा किलोग्राम बीज की मात्रा डाली जाना चाहिए, लेकिन उसमें पहले बीज को जड़सड़न व तना गलन रोग से बचाव के लिए दो ग्राम कारबेंडाजिम से उपचारित कर लें। कतारों में 30 सेमी के फासले पर 4-5 सेमी गहरी सरसों बीज ड्रिल से बोए।

सरसों की बुआई (सिंचित क्षेत्र) 10 से 25 अक्टूबर के बीच बोई जा सकती है, जो फायदेमंद रहती है। इसके बाद बुआई से फसल उत्पादन क्षमता घटने लगती है। सरसों की बुआई के पहले खाली पड़े खेत को जोतकर तैयार कर लें। साथ ही इसके लिए खाद-बीज का चयन कर लें। पूसा गोल्ड, पूसा जगन्नाथ, पूसा मस्टर्ड-21, पूसा अग्रणी, पूसा बोल्ड, पूसा किसान आदि किस्में लगा सकते हैं।

ऐसे तैयार करें ट्राइकोडर्मा

एक पॉलिथिन में सफेद रंग की 250 ग्राम ज्वार लें। इसे इतने ही पानी में उबालने के बाद ठंडा कर एक बॉक्स में डालें। इसके बाद स्परित लेंप से बॉक्स में फंगस को खत्म करेंगे। इस प्रक्रिया के बाद उसमें ट्राइकोडर्मा जीवाणु छोड़ेंगे, यह जीवाणु खुद ग्रोथ करने लगते है। एक सप्ताह में ट्राइकोडर्मा तैयार हो जाता है।

खेत में ऐसे करें इस्तेमाल

खेत में एक क्विंटल गोबर की खाद की छाया में बेड बनाकर उसके ऊपर आधा किलोग्राम ट्राइकोडर्मा डालें। इसके बाद यह खुद ग्रोथ करने लगेंगे, और ऊपरी सतह को हरे रंग में परिवर्तित कर देंगे। फसल बुआई से पहले पूरे खेत में ट्राइकोडर्मा तैयार खाद डालें। यह खाद उपयुक्त जीवाणु जमीन में फंगस को खत्म कर पौधों में आने वाले जड़गलन, तना गलन रोग की रोकथाम करेंगे।

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