खरीफ सीजन में अतिवृष्टि से बर्बाद हुए किसानों पर अब तापमान की मार, सरसों की बोवनी प्रभावित

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श्योपुर Oct 17, 2018

खरीफ सीजन में अतिवृष्टि से पिटे किसानों को सरसों की बोवनी भी भारी पड़ रही है। इसलिए कि न सिर्फ बोवनी के समय गर्मी अधिक है बल्कि उन्हें बोवनी के लिए ज्यादा बीज और खाद देना पड़ रहा है। उधर कृषि विभाग के अफसर तापमान गिरने तक बोवनी नहीं करने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन किसान इस बात से चिंतित हैं कि यदि बोवनी समय रहते नहीं की गई तो जमीन की नमी सूख जाएगी। ऐसे में वह कहीं के नहीं रहेंगे। जबकि अधिक तापमान में बोवनी से बीज के अंकुरण के प्रभावित होने का खतरा भी बरकरार है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सरसों की बोवनी के लिए 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान उपयुक्त नहीं माना जाता है। जबकि वर्तमान में जिले का तापमान 35 से 36 डिग्री सेल्सियस के बीच झूल रहा है। जाहिर है कि तापमान की दृष्टि से यह समय बोवनी के लिए उचित नहीं है। बावजूद इसके जिले में अब तक 14 हजार हेक्टेयर में सरसों की बोवनी की जा चुकी है। इन किसानों ने बोवनी में जल्दबाजी दिखाई है, ताकि खेतों की नमी न सूखने पाए। उधर ज्यादातर किसान इस बात को लेकर चिंतित हैं। इस कारण उन्होंने तापमान के गिरने तक बोवनी नहीं करने का विचार किया है। लेकिन दोनों ही परिस्थितियों में किसानों की चिंताएं कम नहीं होंगी। वजह साफ है, तापमान अधिक होने पर बोवनी करने में न सिर्फ बीज व खाद अधिक खर्च हो रहा है बल्कि बीज के अंकुरण पर भी खतरा मंडरा रहा है। जबकि तापमान गिरने तक इंतजार किया गया तो बोवनी पिछड़ने का भी डर है। वहीं कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक समय से पहले और अधिक तापमान में यदि सरसों की बोवनी की जाती है तो सरसों में पेंडेड बग नामक कीड़ा लगने का खतरा बढ़ जाता है। इस कारण किसानों को धैर्य रखना चाहिए और तापमान गिरने पर पलेवा करने के बाद ही सरसों की बोवनी करना चाहिए। वहीं मौसम केंद्र के मुताबिक दिन का अधिकतम तापमान 35.5 डिग्री से कम नहीं हो रहा है। गुजरे एक सप्ताह में यह तापमान 35 डिग्री से नीचे नहीं गया है। जबकि इससे पहले तो 37 से 38 डिग्री सेल्सियस तक तापमान रिकॉर्ड किया गया है। दिन में गर्मी के कारण लोगों को पंखे चलाने पड़ रहे हैं। रात के तापमान में भी खास गिरावट दर्ज नहीं की गई है।

सरसों की बोवनी के लिए उजाड़े थे खेत, अब मौसम साथ नहीं दे रहा

जिले में सोयाबीन उत्पादकों ने खुद अपने हाथों से अतिवृष्टि से खराब हुई उड़द, तिली व सोयाबीन की फसल उजाड़कर सरसों की बोवनी की तैयारी की थी, लेकिन ज्यादातर किसान मौसम में तापमान अधिक होने के कारण बोवनी नहीं कर पाए हैं। कृषि विभाग भी तापमान गिरने तक बोवनी नहीं करने की सलाह किसानों को दे रहा है। उपसंचालक कृषि के अनुसार, किसानों को अभी बोवनी नहीं करना चाहिए। इसके लिए पलेवा करना सही रहेगा।

बोवनी की सलाह दे रहे हैं

25 अक्टूबर के बाद बोवनी करें

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