तेज धूप से सोयाबीन और उड़द में लगा रोग, पौधों की बढ़वार थमी

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श्योपुर –

जिले में 12 दिन से बारिश का दौर थम गया है। तेज धूप भी निकल रही है। इस कारण सोयाबीन, धान और उड़द की फसलों में कीट व्याधि के साथ-साथ रोग भी लगने लगे हैं। इसमें लाल धब्बा रोग से वर्तमान में किसान परेशान हैं। यह रोग फसलों को बढ़ने नहीं दे रहा है। यदि कुछ दिन आैर ऐसी स्थिति रही तो पैदावार पर प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि रोगों की रोकथाम के लिए कृषि सलाहकार किसानों को दवा छिड़काव के बारे में जानकारी दे रहे हैं।

जिले में अब तक 624.4 मिमी औसत बारिश दर्ज की गई है, जबकि बारिश का औसत आंकड़ा 822 मिमी का है। यह बारिश महज 20 दिनों में हुई, जबकि जून, जुलाई माह में छुटपुट बारिश रही। अगस्त माह समाप्त होते-होते बारिश बंद हो गई। पिछले करीब 12 दिन में एक-दो बार बहुत कम बारिश हुई है। इस दौरान तेज धूप निकल रही है। इससे फसलों पर विपरीत असर पड़ने लगा है। धूप ने फसलों को न सिर्फ नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है, बल्कि बरसाती कीटों में भी इजाफा हो गया है, जो सीधे फसलों में लग रहे हैं। यह कीट धान, सोयाबीन, उड़द की फसलों के पत्तों में लगे हैं, इससे पौधा बढ़ नहीं पा रहा है। इन कीटों को रोकने के लिए किसान लगातार दवाइयों का छिड़काव कर रहे हैं। इन्हीं फसलों में लाल धब्बा रोग भी आ गया है, जिसमें फसल के पत्तों में लाल धब्बा आने के बाद पत्ते खराब हो रहे हैं और फसल प्रभावित हो रही है। इस रोग व कीटों के कारण पैदावार पर असर पड़ सकता है। इससे सोयाबीन, धान व उड़द की फसल में दाना छोटा रहेगा और वजन कम हो जाएगा जिससे किसानों को 30 फीसदी तक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

किसान चिंतित, कृषि सलाहकार किसानों को दे रहे दवा छिड़काव की सलाह

सोयाबीन की फसल में दवा छिड़कता किसान।

सोयाबीन में पीला मोजेक लगा तो पत्ते हो जाएंगे पीले, नहीं आएगी फली

लाल धब्बा रोग व कीट व्याधि के अलावा पीला मोजेक वायरस का डर भी किसानों का सता रहा है। बारिश रुकने के साथ इस रोग के बढ़ने का खतरा बना हुआ है। यह रोग सोयाबीन की फसल में होता है, जिसे किसानों ने इस साल 19 हजार हेक्टेयर में बोया है। और कुछ दिन तेज धूप निकली तो पीला मोजेक वायरस हवा के साथ तेजी से फैलेगा। इस रोग से सोयाबीन फसल के पत्ते पीले हो जाते है और फली नहीं आती है। इसे लेकर कृषि सलाहकार सलाह दे रहे हैं कि अगर पीला मोजेक वायरस फसल में लगे तो पीली पौध को उखाड़कर गाढ़ दें, जिससे यह आगे नहीं फैले। साथ ही दवा का निरंतर छिड़काव करें।

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