कम बारिश हाेने से खराब हुई उड़द की फसल, अब तक नहीं हुआ कटाई प्रयोग

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टिमरनी | Sep 22, 2018

ब्लाॅक में टिमरनी-रहटगांव तहसील में लगभग 75 प्रतिशत उड़द फसल की कटाई हो चुकी है। लेकिन अभी तक प्रशासन स्तर से फसल कटाई प्रयोग की शुरुआत नहीं की गई है। इस मामले में भाकिसं ने एसडीएम को आवेदन दिया है। संघ के तहसील अध्यक्ष दीपचंद नवाद ने बताया संगठन ने पूर्व में भी प्रशासन को कई बार ज्ञापन देकर यह मांग की थी। इसके बाद भी कोई ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा अधिकांश किसानों की उड़द फसल 10 से 15 किलो प्रति एकड़ निकल रही है। इस स्थिति में फसल कटाई प्रयोग शुरू नहीं किया तो कब किया जाएगा।

इधर बीमा दिए जाने की बात आती है तो प्रशासन से बीमा कंपनी की तरफदारी करते हुए किसानों से कहा जाता है 7 वर्ष कि फसल कटाई प्रयोग में से 2 कमजोर वर्ष छोड़कर 5 वर्ष की फसल कटाई प्रयोग का एवरेज निकालकर बीमा दिया जाता है। लेकिन वर्तमान स्थिति में फसल कटाई प्रयोग नहीं होने से यह सिद्ध होता है कि पूर्व के वर्षों में बीमा कंपनी को फायदा पहुंचाने सरकारी कार्यालय में बैठकर फर्जी फसल कटाई प्रयोग की जानकारी देकर किसानों को फसल बीमा के लाभ से वंचित कर दिया है। अभी भी फसल कटाई प्रयोग शुरू नहीं होने से ऐसा लग रहा है कि प्रशासन इस वर्ष भी बीमा कंपनी को लाभ पहुंचाने क्षेत्र के किसानों के साथ धोखा कर रहा है। संगठन ने उड़द फसल की अनावरी घोषित किए जाने मांग की है। साथ ही सोयाबीन व अन्य फसल जिनकी कटाई शुरू हो गई है, उनके फसल कटाई प्रयोग शुरू किए जाने मांग की है। संघ ने कहा है फसल कटाई प्रयोग शुरू नहीं होने पर किसानों को होने वाले नुकसान की जवाबदारी प्रशासन की रहेगी और इसकी भरपाई की जाएगी।

टिमरनी। क्षेत्र में खेतों में उड़द की स्थिति ऐसी है।

बोवनी से भी कम निकल रही उड़द किसानों ने सर्वे कराने की मांग की

आलमपुर| पिछले दो-तीन वर्षों से लगातार सोयाबीन की फसल खराब होने से इस वर्ष आलमपुर, दूध कच्छ बहरा गांव सहित क्षेत्र के किसानों ने इस वर्ष उड़द की फसल की बोवनी ज्यादा रकबे में की थी, लेकिन इस वर्ष उड़द की फसल खराब हो चुकी है और उनका अभी तक सर्वे भी नहीं हो पाया है, जबकि कई किसानों की फसल कटकर निकल चुकी है। कुछ किसानों ने सोयाबीन की फसल लगाई थी, वह कुछ ठीक है और उड़द की फसल लगभग पूरे क्षेत्र में खराब हो चुकी है। आलमपुर के किसान अखिलेश दीक्षित ने बताया उन्होंने इस वर्ष 4 एकड़ में 60 किलो उड़द के महंगे बीज लेकर बोए थे और जिसमें लगभग 20, 000 रुपए के कीटनाशक का स्प्रे किया था। लेकिन जितना बीज बोया था, फसल उससे भी कम निकली है। इतनी कम फसल निकलने पर किसान चिंतित हैं एवं आर्थिक परेशानी हो रही है। क्योंकि अभी तक कीटनाशक एवं अन्य खर्च ज्यादा हो चुका है। गांव के किसान डॉ. एसएन चाचरे, मोहनदास, विष्णुदास चाचरे, रामकृष्णा चौधरी, सेवाराम चौधरी, जय नारायण चौधरी, सुनील मालवीय, मनीष पाटिल, संगम पाटिल, जयप्रकाश पटेल, सरदार पाटिल, शेरसिंह तोमर, भागवत सिंह, ज्ञानसिंह राजपूत, कैलाश चाचरे सुरेंद्र अवस्थी ने बताया हार्वेस्टर से कटाई में जो खर्च में आया है, वह भी पूरा नहीं हो पा रहा है।

आश्वासन देकर भूले अधिकारी

भारतीय किसान संघ ने किसानों की समस्याओं को लेकर मंडी प्रांगण में 5 सितंबर को आंदोलन शुरू किया था। आंदोलन के पहले ही दिन धरना स्थल पर पहुंचे एसडीएम एचएस चौधरी, तहसीलदार अल्का एक्का ने संगठन की मांगों को लेकर बैठक किए जाने का आश्वासन दिया था। लेकिन यह बैठक अभी तक नहीं हो सकी है। संगठन ने प्रशासन से समस्याओं के समाधान को लेकर बैठक किए जाने मांग रखी है।

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