सिंचाई में ट्यूबवेल का उपयोग बढ़ा, जले ट्रांसफार्मर के 3 केस रोज आ रहे सामने

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बारिश ना होने से किसान धान में सिंचाई के लिए ट्यूबवेलों पर आधारित हैं। इसलिए बिजली की डिमांड लगातार बढ़ रही है। लोड के कारण ट्रांसफार्मर भी फेल हो रहे हैं। बिजली दफ्तर में ट्रांसफार्मरों के लिए किसान रोज पहुंच रहे हैं। उपलब्धता के आधार पर ट्रांसफार्मर दिए जा रहे हैं। 25 केवीए के ट्रांसफार्मर ज्यादा फेल हो रहे हैं। बारिश ना होने से कृषि पंपों का लोड है। इस महीने करीब 100 ट्रांसफार्मर गांवों में बदले जा चुके हैं। जानकारी के मुताबिक दीनदयाल योजना के तहत 25 केवीए के स्थान पर अब 63 केवीए के ट्रांसफार्मर गांवों में लगाए जा रहे हैं। ताकि लोड सहन कर सकें। बारिश कमजोर होने से धान के खेतों में पानी भरने के लिए धड़ल्ले से ट्यूबवेल चल रहे हैं।

किसानों के मुताबिक भूजल स्तर 150 फीट तक है। पानी उतरने से पाइप बढ़ाने पड़ रहे हैं। धान के रोपा लगाने में एक एकड़ में 12 से 15 हजार रुपए के बीच लागत आ रही है। रोज करीब 10 से 15 लाख यूनिट बिजली खपत ग्रामीण क्षेत्रों में हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां 180 फीट पर जल स्तर था अब 200 फीट पर पहुंच गया है। किसान भोजपाल चौधरी ने बताया किसान बारिश की आस लगाकर बैठे हैं। सभी अपनी क्षमता अनुसार सिंचाई कर रहे हैं। 498 एमएम बारिश दर्ज की गई है। उमस भी बनी हुई है। इससे गर्मी का अहसास बना हुआ है। पंखे और कूलर अभी भी चल रहे हैं। पिछले साल इन्हीं दिनों तक 631 एमएम बारिश हो चुकी थी। अगस्त अंत में बारिश की संभावनाएं जताई जा रही हैं।

कृषि अधिकारियों के मुताबिक धान करीब 15 हजार हेक्टेयर में होगी। अभी गिरदावली सर्वे होना बाकी है। पटवारी नागद्वारी मेला ड्यूटी में व्यस्त हो गए थे। अब इस माह यह सर्वे हो जाएगा। कई किसानों ने पानी की उपलब्धता ना होने से उड़द और मक्का भी लगाया है। कृषि अधिकारियों के मुताबिक धान फसल फिलहाल अच्छी स्थिति में है। धान फसल करीब डेढ़ माह की हो गई है।

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