29 बांधों में वाटर लेवल शून्य, सिंचाई के लिए 40 हजार किसानों को नहीं मिल पाएगा पानी

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Oct 03, 2018

इस साल भी अल्पवर्षा के कारण बांधों में बेहद कम पानी स्टोर हुआ है। 157 बांधों में से केवल 15 बांध ही 100 प्रतिशत भरे हैं। 29 बांधों में तो लेवल शून्य यानी नहर के लेवल तक भी पानी नहीं आया है। ऐसे में जिले के बांधों पर निर्भर 50 हजार किसानों में से 40 हजार किसानों को फसल सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पाएगा। मात्र 10 हजार किसानों को ही पानी मिलने की उम्मीद है। यहां यह भी साफ नहीं है कि उन्हें भी सिंचाई के तीन पानी मिलेगा भी कि नहीं। किन बांधों से पानी देना है और किनसे नहीं इस पर निर्णय लेने बैठकें आयोजित करने की प्लानिंग की जा रही है। इनमें जल संस्थाओं, किसानों और प्रशासनिक अधिकारियों के विचार मंथन के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

केवल ये 15 बांध 100 प्रतिशत भरे

केवल भीमपुर, चिखली, डोडाजाम, डोडराबैराज, कुंड, नहरपुर बैराज, पालंगा बैराज, चिखलपाटी बैराज ,गोलई बैराज, गोपीनाथपुर, मानसिवनी और माथनी ही ऐसे हैं जो कि 100 प्रतिशत भरे हैं। ये बेहद छोटे बांध और बैराज हैं। इसी कारण कम बारिश में भी ये पूरी तरह भर गए हैं। मुलताई का बघोली भी 100 प्रतिशत भर गया है।

पानी की स्थिति डैमों की संख्या

29 डैम 0 प्रतिशत भरे हैं

26 डैम 0 से 10 प्रतिशत भरे हैं

40 डैम 11 से 25 प्रतिशत भरे हैं

26 डैम 26 से 50 प्रतिशत तक भरे हैं

15 डैम 51 से 75 प्रतिशत तक भरे हैं

21 डैम 76 से 100 प्रतिशत तक भरे हैं

पिछले साल केवल 73 बांधों से ही मिला था पानी

2710 करोड़ लीटर है सभी बांधों की क्षमता 900 करोड़ लीटर पानी ही हुआ स्टोर

जिले के सभी बांधों की कुल जल संग्रह क्षमता 2710 करोड़ लीटर है, लेकिन इनमें पानी का स्टोरेज केवल 900 करोड़ लीटर हुआ है। इस कारण प्लानिंग करना जरूरी है।

बड़े बांधों के हालात बेहद खराब

जिले के बड़े बांधों में भी इस बार पानी स्टोरेज बेहद कम है। बुंडाला बांध में 24.35 प्रतिशत, चंदोरा बांध में 29.99 प्रतिशत और सोनखेड़ी डैम में 57.67 प्रतिशत पानी ही स्टोर हुआ है। बड़े बांधों से पानी मिलने के भी बेहद कम आसार हैं। कोसमी डैम का पानी भी पेयजल के लिए रिजर्व रखा जा सकता है।

जल्द ही बैठकें लेकर निर्णय लिया जाएगा

पिछले साल केवल 73 बांधों से ही किसानों को पानी दिया गया था। 74 बांधों से किसानों को पानी नहीं दिया था। बुंडाला जैसे बड़े बांध से भी पानी नहीं मिला था। पिछले साल 42 बांधों से एक बार, 26 बांधों से दो बार और 5 बांधों से तीन बार पानी छोड़ने का निर्णय लिया था। ऐसे में किसानों को पानी के लिए तरसना पड़ा था। इस बार भी ऐसे ही हालात बनते दिख रहे हैं।

पानी के मैनेजमेंट को लेकर पिछले साल सितंबर से शुरू हो गई थी बैठकें

पिछले साल भी बांधों में बेहद कम जलसंग्रह हुआ था। इस कारण सितंबर से ही पानी के मैनेजमेंट को लेकर बैठकें शुरू हो गईं थी। 7 मैराथन बैठकें लेकर बांधों से पानी देने पर निर्णय लिया था। लेकिन इस बार तैयारियां आज तक शुरू नहीं हुई है।

510 करोड़ लीटर पानी देने की होगी प्लानिंग

जलसंसाधन विभाग के सूत्रों की मानें तो इस साल इसमें से 510 करोड़ लीटर पानी ही सिंचाई के लिए दिया जाएगा। 390 करोड़ लीटर पानी निस्तारी और पेयजल के लिए रिजर्व रखा जाना तय किया जा रहा है। फाइनल निर्णय बैठक में ही होगा।

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