ऐसा क्या था प्याज में जो किसान ने बेचने से कर दिया इंकार

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Nov, 03 2018

नीमच. कोई ढेर 6 रुपए तो कोई ढेर 7 से 8 रुपए किलो बिक रहा था। लेकिन आश्चर्य तो तब नजर आया, जब कुछ ढेर 2 से ढ़ाई रुपए किलो बिक गए। ऐसे में एक ढेर मात्र डेढ़ रुपए किलो बिकने पर अन्नदाता ने प्याज देने से ही मना कर दिया। जैसे ही उस ढेर की तुलाई होने लगी किसान ने साफ मना कर दिया कि मैं नहीं बेच रहा हूं। कैंसिल करवाऊंगा।
यह हालात कृषि उपज मंडी में स्थित प्याज मंडी में शुक्रवार को नजर आए। जहां एक सप्ताह पहले प्याज ने आसमान छू रखा था। प्याज 8-10 रुपए किलो से लेकर 15 रुपए किलो तक बिक रहा था। वही प्याज शुक्रवार को अधिकतम 11 रुपए प्रति किलो का आंकड़ा टच कर पाया था। जिसमें से अधिकतर ढेर 6 से 8 रुपए प्रति किलो के दाम पर नीलाम हुए थे। वहीं कुछ ढेर 2,3 , 4 रुपए किलो तक नीलाम हुए। ऐसे में नीलामी होते ही अन्नदाता के चेहरों पर मायूसी नजर आइ। लेकिन मजबूूरी में अधिकतर ने माल तुलवा दिया। लेकिन जिन किसानों को गिरा हुआ रेट समझ नहीं आया, उन्होंने अपना प्याज देने से साफ मना कर दिया।

बतादें की प्याज मंडी में शुक्रवार को करीब 4000 से अधिक कट्टे प्याज की आवक हुई। जिसके कारण प्याज मंडी के शेड फूल होने के साथ ही शेड के दोनों ओर दूर दूर तक प्याज के ढेर नजर आ रहे थे। जिसका मुख्य कारण नए प्याज की जोरदार आवक होना है। किसानों ने बताया कि अभी मात्र 25 प्रतिशत प्याज की भी आवक नहीं हुई है। तो ऐसे हाल हैं। तो जब लगातार यह आवक बनी रहेगी तो दाम कितने ओर गिरेंगे।
आज खुलेगी मंडी, फिर आठ दिन तक रहेगा अवकाश

कृषि उपज मंडी शनिवार को खुलेगी, इसके बाद रविवार से रविवार तक करीब आठ दिन का अवकाश रहेगा। इसके बाद अगले सोमवार को ही मंडी खुलेगी। मंडी निरीक्षक भगतसिंह चौहान ने बताया कि मंडी दीपावली सहित अन्य अवकाशों के चलते करीब 4 नवंबर से 11 नवंबर तक बंद रहेगी। इसके बाद किसान सीधे 12 नवंबर को उपज लेकर आए।
प्याज के दाम काफी गिर गए हैं। मेरा प्याज शुक्रवार को मात्र 740 रुपए क्ंिवटल बिका है। जबकि प्याज कम से कम 1000 रुपए क्ंिवटल बिकना चाहिए। तब जाकर किसान को कुछ लाभ मिल पाता है। चूकि 60 रुपए भाड़ा और 20 रुपए कट्टे के अनुसार हम्माली आदि खर्च लग जाते हैं। इस कारण इतने कम दाम में बेचने से कोई फायदा नहीं हो रहा है।
-जगदीशचंद्र पाटीदार, किसान देवरी खवासा
अन्य उपज की अपेक्षा प्याज में मजदूर अधिक लगते हैं। क्योंकि प्याज की बोवनी एक एक दाना लगाकर करनी पड़ती है। वहीं निकालने में भी प्याज को जमीन के अंदर से एक एक कर निकालना पड़ता है। इस कारण प्याज १५ रुपए किलो से कम बिकने में नुकसान ही है।
-रामप्रसाद पाटीदार, किसान जावी
मेरा प्याज बेहतर होने के बाद भी मात्र 151 रुपए प्रति क्ंिवटल के दाम पर नीलाम हुआ। यह दाम काफी कम है। इसलिए मैंने इस दाम में प्याज बेचने से मना कर दिया। शुक्रवार को अधिकतर ढेर डेढ़ से 2-3-4 रुपए किलो बिके हैं। मैंने अपना ढेर कम दाम में देने से मना कर दिया। नीलामी भी कैंसिल करवा ली।

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